बाल सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन मुस्कान’: देहात पुलिस ने गाँगीवाड़ा स्कूल में छात्रों को सिखाया ‘गुड टच-बैड टच’ और साइबर सुरक्षा

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा बाल दिवस के अवसर पर, बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से थाना देहात पुलिस द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान के तहत, गाँगीवाड़ा हायर सेकंडरी स्कूल, छिंदवाड़ा में एक भव्य जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें स्कूल के लगभग 400-500 छात्रों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
​इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बाल सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर छात्रों को जागरूक करना था।
​CSP राणा ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
​जनसंवाद कार्यक्रम में मुख्य रूप से CSP (सिटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) छिंदवाड़ा, अजय राणा , और थाना प्रभारी थाना देहात, गोविन्द सिंह राजपूत उपस्थित रहे। इनके साथ SI वर्षा सिंह, HC मंगल सिंह टेकाम, और म.आर. राजकुमारी भी मौजूद थीं।
​अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को निम्नलिखित विषयों पर गहन और सरल भाषा में महत्वपूर्ण जानकारी दी:
​”गुड टच” और “बैड टच” की समझ: बच्चों को सिखाया गया कि वे अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच के अंतर को पहचानें और किसी भी असहज स्थिति में चुप न रहें।
​साइबर सुरक्षा: इंटरनेट और सोशल मीडिया के खतरों के प्रति जागरूक किया गया, जिसमें ऑनलाइन धोखाधड़ी और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा शामिल थी।
​नशे के दुष्परिणाम: छात्रों को नशे और इसके समाज तथा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में बताया गया।
​अजनबियों से सावधानी: बच्चों को सिखाया गया कि वे अजनबियों से दूरी बनाए रखें और किसी भी तरह के प्रलोभन में न आएं।
​पुलिस का संदेश: तुरंत करें डायल-112
​अधिकारियों ने बच्चों को जागरूक करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी असामान्य, डर वाली या असहज स्थिति में तुरंत डायल-112 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस सहायता केंद्र से संपर्क करें।
​थाना देहात पुलिस ने बताया कि ‘ऑपरेशन मुस्कान’ का मूल उद्देश्य समाज में लापता, असहाय या शोषित बच्चों तक पहुँचना और उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करना है। इस पहल के तहत, पुलिस लगातार ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही है, ताकि बाल सुरक्षा के प्रति समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मज़बूत किया जा सके।
​यह कार्यक्रम बाल दिवस के अवसर पर पुलिस और समाज के बीच एक सकारात्मक और मजबूत संबंध बनाने में मील का पत्थर साबित हुआ।

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