स्वच्छता के दावों की पोल: सिंहवाहिनी वार्ड का विसर्जन कुंड बना गंदगी का अड्डा, नपा ने नर्मदा में छोड़ा केमिकल मिक्स सड़ा पानी
स्वच्छता अभियान की उड़ रही धज्जियां
सिंहवाहिनी वार्ड का विसर्जन कुंड बना गंदगी का अड्डा, नपा ने मां नर्मदा में छोड़ा केमिकल युक्त सड़ा पानी
दीवारों पर स्वच्छता के नारे, लेकिन खुद फैला रही गंदगी, नर्मदा संरक्षण की खुली पोल,

रेवांचल टाईम्स – मंडला, मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्वच्छता अभियान हकीकत के धरातल में क्रियान्वित नहीं हो रहे हैं इस अभियान अंतर्गत सिर्फ धांधली घोटाले बाजी जमकर की जा रही है और कोई काम नहीं किया जा रहा है। आज भी मंडला जिले के वार्डों नाली गंदगी से बजबजा रही सड़को के किनारे कूड़े के ढेर आसानी से देखने को मिल जाएगे साफ़ सफाई की ओर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है नगर उपनगर में गंदगी का साम्राज्य स्थापित हो गया है, स्वच्छ भारत मिशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है, और जिम्मेदार चैन की नींद में आराम फरमा रहे है दिन व दिन सफाई का स्तर घटता जा रहा है।

वही एक ऐसा ही मामला जिला मुख्यालय मंडला में चर्चा का विषय बना हुआ हैनगर पालिका मंडला की लापरवाही और दोहरे रवैए से नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। एक ओर दीवारों पर स्वच्छ मंडला, सुंदर मंडला और नर्मदा हमारी मां है, इसे स्वच्छ रखें जैसे नारे लिखे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका खुद उन्हीं संदेशों की धज्जियां उड़ा रही है।
सिंहवाहिनी वार्ड में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए बनाया गया कुंड अब गंदगी, सड़ांध और मच्छरों का अड्डा बन चुका है। प्रतिमा विसर्जन को एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नगरपालिका ने कुंड की सफाई नहीं कराई। नागरिकों ने नगरपालिका पर आरोप लगाया है कि गणेश विसर्जन के बाद कुंड का केमिकल युक्त सड़ा पानी मशीन के जरिए मां नर्मदा नदी में बहा दिया गया था, जिससे नर्मदा का जल प्रदूषित हो रहा है।

नर्मदा में सीवर लाइन का गंदा पानी भी छोड़ा गया
वही वार्डवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका द्वारा सीवर लाइन का गंदा पानी सीधे नर्मदा में छोड़ा गया है। यह कार्य न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अक्षम्य अपराध है। एक ओर सरकार नर्मदा संरक्षण अभियान पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं नगर पालिका खुद इस पवित्र नदी को प्रदूषण की ओर धकेल रही है।
वार्डवासियों में आक्रोश, बीमारी का खतरा बढ़ा
वार्ड के नागरिक शंकर बरमैया, दीपक बरमैया, संजू वाजपेई, पप्पू रावत, पीके बरमैया सहित अन्य लोगों ने बताया कि कुंड से उठती दुर्गंध के कारण रहना मुश्किल हो गया है। चारों ओर मच्छरों का आतंक है, बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं। नागरिकों ने कई बार शिकायतें कीं, यहां तक कि 181 हेल्पलाइन में भी रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन नगरपालिका ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया।
नर्मदा संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल
नगर पालिका द्वारा बनाए गए विसर्जन कुंड का मकसद नर्मदा को प्रदूषण से बचाना था, लेकिन जब वही संस्था जहरीला पानी और सीवर का गंदा जल नर्मदा में बहा रही है, तो यह न केवल पर्यावरण, बल्कि आस्था के साथ भी विश्वासघात है। मां नर्मदा की पवित्रता को स्वयं प्रशासन दूषित कर रहा है।
जनता त्रस्त, नगरपालिका बेपरवाह
वही जानकारी के अनुसार पूरा वार्ड गंदगी और सड़ांध से जूझ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन कागजों पर ही चमक रही है। और दीवारों पर लिखे स्वच्छता संदेश शोभा बढ़ा रहे पर जमीनी हालात में गहरा विरोधाभास है। नगर पालिका कार्यालय से लेकर गलियों तक बदबू, गंदा पानी और कीचड़ से लोग परेशान हैं।
वही वार्ड पार्षद श्रीमति माया संजय गुप्ता ने बताया कि कई बार सूचना दी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुर्गा विसर्जन के तीन दिन बाद ही नगरपालिका को लिखित में सूचित किया गया था। समय-समय पर वार्ड भ्रमण कर समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाया, परंतु नगरपालिका ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मैं लगातार प्रयासरत हूं, लेकिन मुझे भी सहयोग नहीं मिल रहा।
नगर पालिका का पक्ष
सीएमओ गजानन नाफडे ने कहा हमारे द्वारा एक बार सफाई करवाई गई थी। अब पानी निकालकर दोबारा साफ पानी भरना पड़ेगा। कर्मचारियों को सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
दोषियों पर कार्रवाई और नर्मदा को बचाने की मांग
वार्डवासी अब जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, विसर्जन कुंड और सीवर लाइन की पूरी सफाई कराई जाए, तथा मां नर्मदा में गंदा या केमिकल युक्त पानी बहाने की घटना दोबारा न हो। ये विर्सजन कुंड आसपास रहने वालों के अभिशाप साबित हो रहा हैं