एक तरफ पूजा–आरती, दूसरी तरफ प्रदूषण में लिप्त जिम्मेदार

आखिर कैसे बचेगी नर्मदा?

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नगर पालिका की लापरवाही फिर उजागर — विसर्जन कुंड का केमिकलयुक्त पानी नाले के रास्ते नर्मदा में बहाया

रेवांचल टाइम्स – मंडला जिला मुख्यालय मंडला में एक ओर माहिष्मती घाट पर प्रतिदिन नर्मदा आरती का भव्य आयोजन किया जा रहा है। घाट को सजाया-संवारा जा रहा है, पर्यटन और धार्मिक महत्व बढ़ाने की बातें हो रही हैं। लेकिन दूसरी ओर नर्मदा संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले ही उसके प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बनते दिखाई दे रहे हैं।
पूर्व में दैनिक स्वदेश अखबार द्वारा सिंहवाहिनी वार्ड स्थित दुर्गा प्रतिमा विसर्जन कुंड की गंदगी और साफ-सफाई न होने के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर सामने आने के बाद नगर पालिका परिषद मंडला ने सक्रियता तो दिखाई, लेकिन सफाई की प्रक्रिया में हुई लापरवाही ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सफाई के नाम पर नई लापरवाही — केमिकलयुक्त पानी नाले में छोड़ा गया

वही वार्डवासियों के अनुसार, नगर पालिका की टीम ने विसर्जन कुंड की सफाई तो शुरू कर दी, लेकिन कुंड का केमिकलयुक्त पानी मशीन लगाकर सीधे नाले में बहा दिया, और वही नाला आगे चलकर नर्मदा में मिलता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मशीन को पानी बहाने के बाद तुरंत कुंड के स्थान से हटा दिया गया, ताकि तथ्य छिपाए जा सकें।
लोगों का कहना है कि यदि अंत में रासायनिक अवशेषों से भरा पानी नर्मदा में ही बहाना था,
तो फिर विसर्जन कुंड बनाने की आवश्यकता ही क्या थी?
ऐसे पानी को सुरक्षित तरीके से टैंकर द्वारा अन्यत्र निस्तारित किया जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने आसान रास्ता चुनकर नर्मदा की सेहत के साथ खिलवाड़ किया है।

नर्मदा संरक्षण के नाम पर औपचारिकता?

वही कुछ स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन और नर्मदा संरक्षण अभियान मंडला में सिर्फ कागज़ों में चल रहा है।
शहर के कई क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था बदहाल है, और नगर पालिका की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
लोग यह भी पूछ रहे हैं कि जब प्रशासन और नगर पालिका ही प्रदूषण फैलाने वाले कदम उठा रहे हैं,

तो फिर नर्मदा को साफ रखने का जिम्मा कौन निभाएगा?

कार्रवाई की मांग तेज — प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हस्तक्षेप की अपील
नागरिकों व सामाजिक संगठनों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारियों से दोषियों पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि रासायनिक मिश्रित पानी को नर्मदा में छोड़ा जाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि “जीवनदायिनी” नर्मदा के अस्तित्व पर सीधा हमला है।
एक ओर धार्मिक आस्था की चमकती ज्योत — दूसरी ओर प्रशासनिक लापरवाही की काली सच्चाई।
प्रश्न साफ है:
नर्मदा को प्रदूषण से कब और कैसे बचाया जाएगा, जब गुनहगारों पर ही कार्रवाई नहीं होती?

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