कक्षा छोड़ छात्रों से करवाई मजदूरी: मॉडल हायर सेकंडरी स्कूल नारायणगंज में शिक्षा समय पर साइन बोर्ड लगवाने का आरोप

शिक्षण समय में छात्रों से करवाई गई मजदूरी लगवाया साइन बोर्ड

मामला शासकीय मॉडल हायर सेकंडरी स्कूल नारायणगंज का

दैनिक रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला आख़िर कैसे पढ़ेगा इंडिया और कैसे बढ़ेगा इंडिया जी हां सही पढ़ा आपने जब एक जिम्मेदार शिक्षक ही अध्ययनरत बच्चों से स्कूल में पढ़ाई के अलावा कोई और अन्य काम करवाने लग जाए तो फिर इन नोनिहालों का भविष्य कितना उज्वल होगा आप ही इसका अंदाजा लगा सकते हैं। सूत्रों से जानकारी अनुसार पिछले दिनों ऐसा ही कुछ हुआ नारायणगंज के शासकीय मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल कुड़ामैली में जहां 20 नवंबर की तारीख को स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से स्कूली शिक्षकों ने पढ़ाई के समय पर पढ़ाई न करवाते हुए मजदूरी के काम पर लगा दिया गया। नारायणगंज के शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों के द्वारा शिक्षण के समय पर स्कूल में पढ़ाई करने वाले छात्रों से साइन बोर्ड लगवाने का काम करवाया गया।, जानकारीनुसार अनुसार विद्यालय में कक्षा संचालन के समय कुछ शिक्षकों द्वारा नेशनल हाइवे के किनारे नया साइन बोर्ड लगाने का कार्य कराया जा रहा था। इस दौरान छात्रों को पढ़ाई की जगह बोर्ड उठाने, पकड़ने और लगाने जैसे कामों में लगाया गया। ऐसा नहीं हैं कि जिले में यह पहला मामला हैं इसके पहले भी स्कूली बच्चों से हॉस्टल अधीक्षक के द्वारा अपने हाथ और पैरों की मालिश करवाने का मामला सामने आया था जहां होस्टल के बच्चों ने रो रोकर के अपने माता पिता से इस बात को जाहिर किया था। और जब समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से संबंधित विभागीय अधिकारियों को पता चला तो लापरवाह हॉस्टल अधीक्षक के ऊपर कार्यवाही करते हुए उसे वहां से हटा दिया गया था।

अब सवाल यह भी उठता है कि एक तरफ सरकार जहां बच्चों के भविष्य को सजाने और संवारने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं तो वही सरकार की मंशा पर पलीता लगाने का काम संबंधित स्कूल विभाग के शिक्षकों के द्वारा ही किया जा रहा हैं।  जहां पर शिक्षण समय पर अपने पदीय दायित्वों का निर्वाहन न करते हुए एक गैर जिम्मेदाराना काम करते हुए बच्चों को मजदूरी जैसे काम पर लगवा दिया गया। एक तरफ सरकार शिक्षकों को जहां डिजिटल उपस्थिति के माध्यम से अपनी उपस्थिति देकर स्कूल में शिक्षण का कार्य करने को आदेश पारित करती है तो वहीं अब शिक्षकों के द्वारा डिजिटल उपस्थिति दर्ज कर बच्चों को पढ़ाई न करवाकर मजदूरी जैसे कार्य को करवाया जा रहा है जो अपने आप में एक चिंता का विषय है।

शिक्षण समय में छात्रों से इस प्रकार के श्रमिक कार्य कराना न केवल अनुचित है, बल्कि यह उनकी पढ़ाई पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।  बच्चों का स्कूल जाना पढ़ाई के लिए होता है न कि मजदूरी जैसे कार्यों के लिए। इस तरह की गतिविधियाँ शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं और बच्चों के मन में विद्यालय न जाने को लेकर के प्रति गलत संदेश जाता हैं।

विद्यालय प्रबंधन को इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए। शिक्षकों का दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि शिक्षण समय या उसके बाद में मजदूरी जैसे शारीरिक श्रम करवाना।

 

इनका कहना हैं…

 

स्कूल में   यदि थोड़ा बहुत काम बच्चों से करवा लिया जाता हैं तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं हैं, बच्चे बड़े हो गए है यदि थोड़ा बहुत काम करवा भी लिया जाता हैं तो उसमें हर्ज क्या हैं। और बच्चे किसी शिक्षक के घर पर काम नहीं किए है स्कूल का ही काम किए होंगे।

डी के सिंगोंर

बीईओ नारायणगंज

 

मेरे द्वारा  इस बात की जानकारी बीईओ साहब को दी गई हैं। शिक्षण समय पर बच्चों को स्कूल में होना चाहिए था न कि स्कूल परिसर से लगभग आधा किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे पर मैं इस बात को लेकर संबंधित अधिकारियों से बात करूंगा और संबंधितों पर कार्यवाही की मांग भी करुंगा।

 

अविनाश शर्मा

स्थाई शिक्षा समिति अध्यक्ष नारायणगंज

सबंधित वीडियो फोटो की रेवांचल टाइम्स अखबार पुष्टि नही करता।

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