सिम्स मेडिकल कॉलेज में ‘मेस’ महाभारत
ठेकेदार ने कलेक्टर से की शिकायत, '800' के नाम पर '250' छात्रों का वसूला जा रहा किराया; करोड़ों का बिल बकाया

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा सिम्स (CIMS) मेडिकल कॉलेज एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गया है, जहां मेस और कैंटीन का संचालन करने वाले ठेकेदार रघुवीर मेस एण्ड केटर्स ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और अनुबंध के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ठेकेदार ने इस संबंध में सीधे जिला कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपकर मामले की उच्च-स्तरीय जाँच की माँग की है।
मुख्य आरोप: नियमों का उल्लंघन और वित्तीय शोषण
ठेकेदार ने कॉलेज प्रशासन पर मनमानी और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा है कि अनुबंध के नियमों को कॉलेज खुद ही तोड़ रहा है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
छात्र संख्या का धोखा: ठेकेदार ने 11 दिसंबर 2023 को तीन साल के लिए मेस का टेंडर लिया था। अनुबंध में 800 छात्रों के आधार पर मासिक किराया ₹30,000 और ₹3,000 बिजली बिल तय किया गया था।
ठेकेदार का दावा: कॉलेज में वास्तव में मात्र 300 छात्र ही हैं, जिनमें से केवल 200 से 250 छात्र ही मेस का उपयोग करते हैं।
जबरन वसूली: इसके बावजूद, कॉलेज प्रशासन उनसे 800 छात्रों के हिसाब से पूरा किराया और बिल वसूल रहा है, जिससे उन पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
अवैध बाहरी वेंडर: शिकायत में कहा गया है कि कॉलेज परिसर में 10 से 12 बाहरी वेंडर अवैध रूप से भोजन सप्लाई कर रहे थे, जिसके कारण मेस में छात्रों की संख्या और कम हो गई। इस पर प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
बकाया बिलों का अंबार: कॉलेज की विभिन्न गतिविधियों के भोजन और चाय-नाश्ते के मद में ठेकेदार का ₹4,39,399 का बिल अभी तक बकाया है, जिसका भुगतान नहीं किया गया है।
मेस फीस का गैर-भुगतान: अनुबंध के बावजूद, पिछले दो महीनों की छात्रों की करीब ₹6 लाख की मेस फीस जमा नहीं हुई है। ठेकेदार का कहना है कि मेस कमेटी की जिम्मेदारी होने के बावजूद फीस नहीं दिलाई जा रही है।
*खाने की गुणवत्ता पर भी विवाद*
शिकायत के दूसरे पहलू में यह सामने आया है कि छात्रों की शिकायतों के बाद, डीन द्वारा ठेकेदार का मेस बंद कर दिया गया है। यह कदम खाने की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के कारण उठाया गया प्रतीत होता है, जिससे यह मामला और भी जटिल हो गया है।
कलेक्टर से गुहार: जाँच और भुगतान की माँग
रघुवीर मेस एण्ड केटर्स ने कलेक्टर से अनुबंध नियमों के उल्लंघन की जाँच करने की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने निम्नलिखित माँगे रखी हैं:
बकाया ₹4,39,399 के बिल का तत्काल भुगतान।
छात्रों से बकाया ₹6 लाख की मेस फीस दिलाने में मदद।
₹10 लाख की FDR और ₹90 हजार की बैंक गारंटी पर लगाए गए अनावश्यक शुल्क को कम करना।
कलेक्टर कार्यालय द्वारा मामले की जाँच शुरू होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। इस बीच, मेस बंद होने से छात्रों के भोजन की व्यवस्था दूसरे मेस वालों से कराई जा रही है।