₹25,000 की रिश्वत का आरोप! कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी रविन्द्र कुमरे निलंबित
जुन्नारदेव के अधिकारी पर शासकीय कार्य में सुविधा के बदले बार-बार अवैध राशि माँगने का आरोप सिद्ध; कलेक्टर ने लिया तत्काल एक्शन
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक सख्त कार्रवाई की गई है। कलेक्टर छिंदवाड़ा द्वारा जारी आदेश क्रमांक /5193/वि०लि०-1 (ए)/2025 के अनुसार, जुन्नारदेव के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी (JSO) रविन्द्र कुमरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर शासकीय कार्यों में सुविधा उपलब्ध कराने के बदले शिकायतकर्ता और उनके परिचितों से बार-बार अवैध धनराशि की मांग करने और कुल लगभग ₹25,000/- की राशि लेने का गंभीर आरोप सिद्ध हुआ है।
जाँच में क्या निकला?
अश्विन गोदवानी, निवासी वार्ड क्रमांक-19 पातालेश्वर छिंदवाड़ा, द्वारा प्रस्तुत शिकायत और स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर, अतिरिक्त कलेक्टर छिंदवाड़ा ने इस मामले की गहन जाँच की। जाँच प्रतिवेदन के परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि कुमरे ने उचित मूल्य दुकान की जाँच, अनुकूल रिपोर्ट देने, या मशीन उपलब्ध कराने जैसे शासकीय कार्यों को लंबित रखने, लाइसेंस निरस्त करने, या प्रतिकूल रिपोर्ट भेजने की धमकी देकर शिकायतकर्ता पर जबरन धनराशि देने का दबाव बनाया।
दस्तावेजी साक्ष्य:
जाँच में व्हाट्सऐप चैट और ₹15,000/- (₹10,000/- दिनांक 21/7/2025 और ₹5,000/- दिनांक 15/09/2025) के UPI लेनदेन जैसे साक्ष्यों से आरोपों की आंशिक पुष्टि होना पाया गया है।
कदाचार की श्रेणी
अतिरिक्त कलेक्टर की जाँच रिपोर्ट के अनुसार, रविन्द्र कुमरे का यह आचरण एक शासकीय सेवक के अपेक्षित मानकों के विपरीत और विभागीय दृष्टि से गंभीर प्रकृति का माना गया है। कलेक्टर ने इस कृत्य को शासकीय कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता और म०प्र० सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 के विपरीत मानते हुए इसे ‘कदाचरण’ की श्रेणी में रखा है।
निलंबन अवधि में रविन्द्र कुमरे का मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी (रा०) कार्यालय अमरवाड़ा नियत किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
प्रभार सौंपा गया:
निलंबन के बाद, जुन्नारदेव कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सुमित चौधरी, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी परासिया को सौंपा गया है।
कलेक्टर हरेन्द्र नारायन के हस्ताक्षर से जारी यह आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है, जो शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है।