आक्रोश: महिला पत्रकारों पर अभद्र टिप्पणी, पत्रकार एवं पूर्व पार्षद उषा राऊत ने दी FIR दर्ज कराने की चेतावनी

109

 

रेवांचल टाइम्स सूर्यकांत भट्ट “बुजदिलों, सुधर जाओ! औरतों के कंधे पर बंदूक रखकर उन्हें ही बदनाम करना बंद करो

महिला पत्रकारों के सम्मान पर लगातार हो रहे हमलों और अभद्र टिप्पणियों को लेकर पत्रकारिता जगत में आक्रोश फैल गया है। इसी क्रम में, वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व पार्षद (प्रदेश उपाध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ, मानव अधिकार संगठन) श्रीमती उषा राऊत ने ऐसे शरारती तत्वों को कड़ी चेतावनी दी है जो महिला पत्रकारों को बदनाम करने में लगे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर माफीनामा पोस्ट नहीं किया गया तो ऐसे तथाकथित पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।
​”तुम्हें महिला पत्रकारों को बदनाम करने का कोई हक नहीं है
​श्रीमती राऊत ने अपने बयान में कहा कि कुछ बुजदिल लोग औरतों के कंधे पर बंदूक रखकर उन्हें ही बदनाम करने में लगे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “तुम लोगों का ना तो औरतों के बिना घर में गुजारा होता है ना बाहर, फिर भी औरतों को हमेशा बदनाम करने की कोशिश करते रहते हो।”
​उन्होंने कुछ पुरुष पत्रकारों को चुनौती देते हुए कहा, “अगर इतने ही मर्द बनते हो तो सामने आकर उन औरतों के बारे में बोलना चाहिए जो गलत करती हैं, सभी महिलाओं को बदनाम करने की कोशिश न करें।”
​चौथा स्तंभ कहलाने वाले पत्रकारों की ‘ओछी हरकतें’
​राऊत ने ऐसे तत्वों के पत्रकारिता के स्तर पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं घर-गृहस्थी और चूल्हा-चौकी संभालने के बाद फील्ड में आकर पत्रकारिता का कार्य करती हैं, उन्हें बदनाम करते हुए शर्म नहीं आती।
​उषा राऊत ने कहा, “चाहे देश को चलाने की बात हो या खेत में हल चलाने की बात, महिलाएं कभी पीछे नहीं रहतीं… एक चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार होकर भी ऐसी ओछी हरकतें करने में शर्म नहीं आती है। ऐसा लगता है कि आपको पत्रकारिता का मतलब ही पता नहीं है।”
​उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सच्चा पत्रकार सिर्फ अच्छाई और बुराई अपने कलम से लिखता है, न कि महिलाओं के प्रति अभद्र शब्दों का प्रयोग करता है।
​FIR और महिला आयोग में शिकायत की तैयारी
​पत्र में विशेष रूप से ‘बंटी-बबली’ जैसे शब्दों वाली पिछली और हालिया पोस्टों का जिक्र किया गया है, जिनसे सभी पत्रकार महिलाओं को आघात पहुँचा है।
​उषा राऊत ने मांग की है कि ऐसे पोस्ट डालने वालों को यह स्पष्ट करना होगा कि यह किसके लिए था। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो महिला पत्रकार शीघ्र ही पुलिस अधीक्षक एवं जिला कलेक्टर से मिलकर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देंगी। साथ ही, महिला आयोग में भी इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
​”यदि एक सप्ताह के अंदर माफीनामा पोस्ट नहीं किया गया तो हम महिला पत्रकार मजबूर होकर ज्ञापन देने के लिए बाध्य रहेंगे, जिसकी जवाबदारी उन शरारती पत्रकारों का होगा। ऐसे शरारती जो अपने आप को पत्रकार कहते हैं, उनके ऊपर भी FIR दर्ज कराने के लिए हम पत्रकार महिलाएं स्वतंत्र रहेंगे।”

Leave A Reply

Your email address will not be published.