चाहे जो निकाल ले खून!

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CMHO और जांच अधिकारी की मिलीभगत से जबलपुर में पनप रही जांच केन्द्रों की अमरबेल : बिना अनुमति चल रही पैथोलॉजी, X-Ray, CT Scan लैब

 

जबलपुर जिले के प्रमुख निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में एक बड़ा अवैध व्यापार पनप रहा है। पैथोलॉजी, एक्स-रे, सीटी स्कैन और विभिन्न जांच सुविधाएं बिना किसी वैध अनुमति और पंजीयन के धड़ल्ले से संचालित की जा रही हैं। इस पूरे खेल में CMHO कार्यालय और कॉल जॉर्ज (जिला अस्पताल) की अधिकारी चमेली भगत की मिलीभगत सामने आई है, जिनकी शह पर यह नेटवर्क फल-फूल रहा है।

न मरीज को सुरक्षा, न नियमों का पालन

* जबलपुर के दर्जनों निजी अस्पतालों में पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे यूनिट, अल्ट्रासाउंड सेंटर और सीटी स्कैन मशीनें चल रही हैं।
* न इनके पास CMHO कार्यालय से लाइसेंस है न ही ड्रग एंड क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत कोई वैधानिक मान्यता।
* ये सारी जांचें अनट्रेंड स्टाफ और बिना क्वॉलिफाइड टेक्नीशियन द्वारा की जा रही हैं, जो सीधे-सीधे मरीज की जान से खिलवाड़ है।
* प्रत्येक जांच केंद्र से मासिक वसूली की जाती है।
* लाइसेंस न होने के बावजूद, CMHO कार्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती।
* जो लैब संचालक नियम पूछते हैं, उन्हें फाइल घुमाने के नाम पर डराया जाता है।

किसी भी केंद्र का नहीं है पंजीयन, फिर भी चल रही जांच

RTI से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी में खुलासा हुआ है कि:

* जबलपुर के अधिकांश निजी अस्पतालों में संचालित पैथोलॉजी लैबों का न तो पंजीयन है और न ही NOC
* CMHO कार्यालय ने पिछले 3 वर्षों में एक भी जांच केंद्र का निरीक्षण नहीं किया
* अधिकांश जांच रिपोर्टें फर्जी डाक्टरों के साइन से जारी हो रही हैं।

जनस्वास्थ्य के नाम पर गुनाह, विभाग मौन

* बिना रजिस्ट्रेशन जांच केंद्र चलाना स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन और हाईकोर्ट के आदेशों का सीधा उल्लंघन है।
* इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में है, बल्कि गलत रिपोर्ट के आधार पर गलत इलाज दिया जा रहा है।
* CMHO और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा है।
* अब सवाल जनता और सरकार से

1. क्यों CMHO और जिला अस्पताल प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की?
2. किसके आदेश से बिना लाइसेंस जांच केंद्र चलाए जा रहे हैं?
3. क्या विभाग को मासिक वसूली के एवज में सब कुछ “वैध” लगने लगा है?

* इन अवैध लैब्स की जांच कमेटी गठित हो
* चमेली भगत और CMHO के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो।
* मरीजों की गलत रिपोर्ट और नुकसान का मुआवजा तय किया जाए।
* इस पर स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट व निरीक्षण कराया जाए

रेवांचल टाइम्स आगे भी इस मामले की पड़ताल जारी रखेगा।

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