जिले में रोजगार संकट गहराया: मवई क्षेत्र के मजदूर रोज़गार की तलाश में कर रहे पलायन
जिले में काम न होने के चलते मजदूरों का शुरू हुआ पलायन
मवई क्षेत्र में रोज़गार की तलाश में रहा है ग्रामीण पलायन
रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले में इन दिनों ग्रामीण अँचलों में रह रहे मजदूरों का खेती का कार्य समाप्त होते ही अब काम की छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरल, अन्य जगहों में शुरु ही चुका हैं।
वही इन दिनों जिले में सरकारी कार्य योजनाएं बन्द होने के चलते ग्राम पंचायत के सभी कार्य बंद चल रहे हैं जहाँ पर लोगो के पास काम न होने के चलते पेट की आग बुझाने के लिए जिले छोड़ अन्य जिले राज्य जाना शुरू हो चुका हैं।
वही मजदूर ने बताया की स्थानीय स्तर कोई काम न होने से हम लोग अपने जीविकापार्जन के लिए बाहर जा रहे है न गांव में काम खुल रहे है न ही आसपास में कही काम मिल रहा है इसलिए हमें गांव और घरबार छोड़ कर हर साल की तहर इस साल भी जाना पड़ रहा हैं, अब अपने खेतो खलहान के सब कामकाज से फुर्सत हो गये है, खेती भी ज्यादा नही है थोड़ा बहुत है वही करते है नही तो मेहनत मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं सरकार तो ग्राम पंचायत में कोई कामकाज तो दे ही रही है और थोड़ा कुछ आता है तो सरपंच सचिव ठेकेदारो से काम को करवा लेते है और अगर कही धोखे से कम दे भी देते है तो मजदूरी का भुगतान ही नही होता है बाहर अच्छा और नगद पैसा मिल जाता है इसलिए गांव के सभी लोग निकल जाते हैं।।
वही मजदूर काम की तलाश में गांव छोड़ जर दूसरे जगहों पर पलायन शुरू का दिये है जहाँ महिला पुरुष और बच्चों के साथ अपना आसियाना छोड़कर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य व जिले जा रहे जिससे अपना भरण पोषण कर सकें इसकी जवाबदेही किसकी होगी !
इस समस्या का समाधान करने के लिए, स्थानीय सरकार और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। उन्हें स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर बढ़ाने के लिए नीतियां बनानी चाहिए और उन्हें लागू करना चाहिए। सरकार कहती है हर व्यक्ति को 100 दिन रोजगार देगे पर वह योजना दूर दूर तक नजर नही आ रही हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं सरकार के रोजगार के लिए बड़े बड़े दावे विफल प्रतीत हो रहे है। और जिला प्रशासन भी इस ओर ध्यान नही दे रहा हैं आख़िर क्यों