आवारा कुत्तों का आतंक: सड़क पर बढ़ता खतरा, महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा पर संकट नगर पालिका के जिम्मेदार मौन…
रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले में आवारा कुत्तों की दिन व दिन बढ़ती संख्या ने आम जनजीवन को गंभीर संकट में डाल दिया है। नगर हो या गांव, मुख्य मार्ग हो या कॉलोनियों की गलियां—हर जगह आवारा कुत्तों का झुंड लोगों के लिए डर और दहशत का कारण बना हुआ है। आए दिन कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
रोजाना बढ़ रही कुत्तों के काटने की घटनाएं
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर निकलते समय हर समय डर लगा रहता है कि कहीं अचानक कुत्तों का झुंड हमला न कर दे। खासकर सुबह और शाम के समय जब बच्चे स्कूल जाते-आते हैं, तब सड़क पर घूमते आवारा कुत्तों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई बार बच्चे डर के मारे साइकिल या पैदल जाने में हिचकिचाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रेबीज और डॉग-बाइट के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। कई कॉलोनियों में दर्जनों कुत्ते रोज सड़क पर दौड़ते दिखाई देते हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक खतरा
आवारा कुत्तों के व्यवहार में अचानक आक्रामकता देखी जा रही है। महिलाएँ शिकायत करती हैं कि कई बार सब्जी बाजार या मंदिर जाने के दौरान कुत्ते पीछा करने लगते हैं। रात के समय स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है। सड़कें सुनसान होते ही कुत्तों के झुंड सक्रिय हो जाते हैं, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है।
नगर के अंदर और राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुत्तों की संख्या से बढ़ रहा हादसों का खतरा
नगर पालिका क्षेत्र और आसपास बिंझिया कटरा से लेकर राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर भी बड़ी संख्या झुण्ड में आवारा कुत्ते घूमते देखे जाते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच कुत्तों की आवाजाही से अचानक ब्रेक लगाने की नौबत आती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका और प्रशासन द्वारा इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। न तो कुत्तों की नसबंदी का अभियान तो चला रही है और न ही कुत्तों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की कार्रवाई। इसके चलते हर दिन लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने, टीकाकरण और नसबंदी की ठोस व्यवस्था की जाए। साथ ही रात के समय गश्त बढ़ाई जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
निवासियों की अपील “इससे पहले कि कोई बड़ी घटना हो, कार्रवाई जरूरी”
नगर वासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब सुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुकी है। बच्चों की सुरक्षा, महिलाओं और मोटरसाइकिल की आवाजाही और आम जनजीवन को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।