एमएसपी और एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक रही शराब,
एमएसपी और एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक रही शराब,

रेवांचल टाइम्स मोहगांव मंडला विकासखंड मोहगांव में स्थित अंग्रेजी शराब दुकान (ठेका) पर निर्धारित एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) से कहीं अधिक दामों पर शराब बेचे जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शराब ठेकेदार द्वारा मनमाने रेट तय कर आम जनता से जबरन अधिक कीमत वसूली जा रही है। इस पूरे मामले में आबकारी विभाग की मिलीभगत होने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।बताया जा रहा है कि पूर्व में मोहगांव क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में शराब गांव-गांव पेकारी के रूप में बेची जाती थी। इससे गांवों में सामाजिक अव्यवस्था, घरेलू हिंसा और अन्य समस्याएं बढ़ रही थीं। इसके विरोध में क्षेत्र की मातृ शक्तियों, सामाजिक संगठनों और जागरूक ग्रामीणों ने एकजुट होकर शराब बिक्री के खिलाफ आंदोलन किया। लगातार विरोध और दबाव के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर काफी हद तक रोक लगी और गांवों तक शराब की पहुंच बंद हो गई।ग्रामीण इलाकों में शराब न पहुंच पाने के कारण अब शराब की मांग मोहगांव स्थित एकमात्र अंग्रेजी शराब दुकान पर केंद्रित हो गई है। इसी का फायदा उठाते हुए ठेकेदार द्वारा शराब के दाम मनमाने ढंग से बढ़ा दिए गए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि दुकान पर अधिकांश ब्रांड्स की बोतलें एमआरपी से 20 से 50 रुपये तक अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं। मजबूरी में ग्राहक ज्यादा पैसे देने को विवश हैं, क्योंकि पूरे क्षेत्र में यही एकमात्र अधिकृत दुकान है।
ग्राहकों का कहना है कि जब वे दुकान में बैठे गद्दीदार से अधिक कीमत वसूले जाने को लेकर सवाल करते हैं, तो उन्हें दो टूक जवाब दिया जाता है। गद्दीदार द्वारा कहा जाता है, “हमें जैसा बोला गया है, हम वही कर रहे हैं। लेना है तो लो, नहीं तो मत लो, कोई जबरदस्ती नहीं है।” इस तरह के रवैये से साफ झलकता है कि ठेकेदार को न तो नियमों का डर है और न ही प्रशासनिक कार्रवाई का।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब आबकारी विभाग की जानकारी और मिलीभगत से चल रहा है। यदि विभाग समय-समय पर दुकानों की जांच करता और रेट लिस्ट का सख्ती से पालन करवाता, तो इस तरह की अवैध वसूली संभव नहीं होती। लेकिन स्थिति यह है कि न तो रेट लिस्ट दुकान पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की गई है और न ही किसी अधिकारी द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक ओर सरकार शराब बिक्री से राजस्व बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को लूटे जाने से रोकने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। महंगाई के इस दौर में जब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही मुश्किल हो गया है, तब शराब के नाम पर लोगों से मनमाने पैसे वसूलना सरासर अन्याय है।क्षेत्र के कुछ जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि आबकारी विभाग तत्काल मोहगांव शराब दुकान की जांच कराए और एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। साथ ही दोषी पाए जाने पर ठेका निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की मनमानी पर रोक लग सके। उनका यह भी कहना है कि दुकान पर सभी शराब ब्रांड्स की रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से लगाई जाए और उपभोक्ताओं को बिल देना अनिवार्य किया जाए।
महिलाओं और ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने गांवों में शराबबंदी के लिए संघर्ष किया, लेकिन अब कस्बे में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया, तो वे एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
फिलहाल मोहगांव में शराब की बढ़ी हुई कीमतें आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक आम लोगों को इस कथित लूट से राहत मिलती है।
इनका कहना
प्रिंट रेट से ज्यादा में शराब नही बेची जा सकती अगर बेंची जा रही है तो ठेकेदार के ऊपर वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।
जिला आबकारी अधिकारी
रामजी पांडे