जिले में डिवाइडर की हालत खस्ता, नागरिकों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
जिले के प्रमुख मार्ग बिंझिया से चिलमन चौक तक बने सड़क डिवाइडर इन दिनों बदहाली का शिकार हो चुके हैं। कभी शहर की सुंदरता बढ़ाने और यातायात को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से बनाए गए ये डिवाइडर अब जर्जर अवस्था में पहुंच गए हैं। डिवाइडर जगह-जगह से टूट चुके हैं, जिनसे आए दिन राहगीर और वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। इसके बावजूद नगरीय निकाय द्वारा इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व इन डिवाइडरों के सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। डिवाइडर पर पौधे लगाए गए थे और उन्हें आकर्षक बनाने के लिए रंग-रोगन भी किया गया था। लेकिन रखरखाव के अभाव में अब न तो वे पौधे दिखाई देते हैं और न ही सौंदर्यीकरण के कोई निशान बचे हैं। पौधों की जगह अब घरों और निर्माण स्थलों से निकला मलबा डाला जा रहा है, जिससे सड़क का स्वरूप और अधिक बदसूरत हो गया है।
डिवाइडर पर लगे पौधों की देखरेख न होने से वे धीरे-धीरे नष्ट हो गए। कई स्थानों पर डिवाइडर पूरी तरह टूट चुके हैं, तो कहीं लोहे की रॉड बाहर निकल आई है। रात के समय कम रोशनी होने के कारण वाहन चालकों को टूटे डिवाइडर नजर नहीं आते और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। दोपहिया वाहन चालक और पैदल चलने वाले लोग इन डिवाइडरों से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और नगरीय निकाय के अधिकारियों को इसकी शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर बजट तो खर्च कर दिया गया, लेकिन बाद में रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी तरह भुला दी गई। यदि समय रहते मरम्मत और पौधरोपण किया जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
नागरिकों की मांग है कि जल्द से जल्द टूटे हुए डिवाइडरों की मरम्मत कराई जाए और वहां दोबारा पौधे लगाए जाएं। साथ ही नियमित सफाई और निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि लोग डिवाइडर को कचरा फेंकने की जगह न समझें। शहर की सुंदरता और नागरिकों की सुरक्षा दोनों के लिए यह आवश्यक है कि नगरीय निकाय अपनी जिम्मेदारी समझे और इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दे।