मनरेगा योजना से बना स्टॉप डेम चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट

केंद्र–राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर गंभीर सवाल
निर्माण एजेंसी पंचायत पर चल रही ठेकेदारी प्रथा
रेवांचल टाइम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में ग्राम पंचायतो में भ्रस्टाचार का खुला खेल चल रहा है भ्रस्टों ने मनरेगा जैसी योजनाओ को भी नहीं बख्श रहें है मनरेगा योजना में खुला भ्रटाचार चल रहा है निर्माण कार्य बनते ही ढह रहें है सरपंच सचिव रोजगार सहायक और उपयंत्री की साठ गाठ के चलते अधिकांश कार्य ठेकेदारों क माध्यम से किये जा रहें जबकि नियमनुसार निर्माण एजन्सी स्वयं पंचायत है वावजूद इसके पंचायतो me ठेकेदारी प्रथा के चलते निर्माण कार्य घटिया और गुणवत्ता हीन कर सरकारी धन में लूट मचा रखी हुई है और जिम्मेदार केवल जांच का हवाला देक़र बचते आ रहें हैं !
वही जानकारी के अनुसार मंडला जिले के विकास खंड मोहगांव में भ्रटाचार का खुला खेल खेला जा रहा है जहाँ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने और ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) आज कई जगहों पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। योजना के अंतर्गत गांव–गांव स्टॉप डेम, तालाब, नाला बंधान और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि वर्षा के जल का संग्रह कर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। लेकिन हकीकत यह है कि कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा से बने स्टॉप डेम गुणवत्ता की कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं और कुछ तो पहली ही बारिश में धराशायी हो गए हैं।
ऐसा ही एक मामला विकासखंड मोहगांव की ग्राम पंचायत पिपरिया के पोषक ग्राम रमखिरिया के झरिया मोहल्ला स्थित इनारी नाला में बने स्टॉप डेम का सामने आया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह स्टॉप डेम वर्ष 2023 में मनरेगा योजना के तहत लगभग 19 लाख रुपये की लागत से निर्मित कराया गया था। निर्माण का उद्देश्य वर्षा जल को रोककर आसपास के खेतों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और भूजल स्तर को बढ़ाना था। लेकिन दुर्भाग्यवश यह स्टॉप डेम पहली ही बारिश में टूटकर बह गया, जिससे पूरे निर्माण की पोल खुल गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस स्टॉप डेम के निर्माण में भारी अनियमितताएं बरती गईं। निर्माण कार्य में सीमेंट, गिट्टी और रेत की गुणवत्ता बेहद घटिया थी। निर्धारित मात्रा में सामग्री का उपयोग नहीं किया गया और तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई। नाला बंधान जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य में मजबूती और टिकाऊपन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए था, लेकिन यहां केवल कागजी खानापूर्ति कर दी गई।
सबसे गंभीर बात यह है कि कार्य स्थल पर न तो निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का कोई परीक्षण किया गया और न ही तकनीकी अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया। उपयंत्री और संबंधित तकनीकी स्टाफ की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य को कागजों में पूर्ण दर्शाकर पूरी राशि निकाल ली गई और सरकारी धन की खुलेआम बंदरबांट की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि स्टॉप डेम के टूटकर बह जाने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिस जल संरचना से खेतों की सिंचाई, पशुओं के लिए पानी और गांव में जल संकट से राहत मिलनी थी, वह अब पूरी तरह बेकार साबित हो रही है। इससे न केवल किसानों की फसल प्रभावित हो रही है, बल्कि आने वाले समय में जल संकट और गहराने की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ किया गया होता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।हैरानी की बात यह है कि स्टॉप डेम टूट कर बह जाने के बाद एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है और न ही ठेकेदार से नुकसान की भरपाई कराई गई है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं केवल भ्रष्टाचार का माध्यम बनकर रह गई हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह वही ग्राम पंचायत है, जहां पदस्थ सचिव कैलाश साहू द्वारा पूर्व में भी कई निर्माण कार्यों में अनियमितताएं की गई थीं। इन्हीं अनियमितताओं के चलते उन्हें निलंबित भी किया गया है। इसके बावजूद उनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों की गंभीरता से जांच नहीं की गई, जिसका परिणाम आज सामने है। इससे यह साफ होता है कि सरपंच, सचिव और उपयंत्री की मिलीभगत से निर्माण कार्यों में खुलकर भ्रष्टाचार किया गया। मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना, जो गरीब और मजदूर वर्ग के लिए वरदान मानी जाती है, यदि इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रही तो जनता का शासन और प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, एफआईआर दर्ज करने और सरकारी धन की वसूली की मांग भी की जा रही है।इस मामले को लेकर अब सभी की निगाहें विकासखंड मोहगांव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। क्या दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।फिलहाल, मनरेगा से बने स्टॉप डेम का टूटना न केवल भ्रष्टाचार की कहानी बयां करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि समय रहते गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो जनकल्याण की योजनाएं अपने उद्देश्य से भटक जाएंगी। ग्रामीणों को अब भी उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों को सजा दिलाएगा और भविष्य में ऐसी लापरवाही करने वाले सरपंच सचिव रोजगार सहायक और उपयंत्री पर कठोर कार्यवाही करते हुए भ्रटाचार पर रोक लगानी की मांग की है