अयोध्या में गूंजा छिंदवाड़ा का नाम: 137 वर्षों का संकल्प हुआ सिद्ध, राम की पेड़ी पर जीवंत हुई रामलीला

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​ रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा|धर्मधानी अयोध्या की पावन धरती पर जब ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष गूंजा, तो वह केवल एक मंचन नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा की ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत की विजय गाथा थी। वर्ष 1889 से निरंतर जारी श्री रामलीला मंडल छिंदवाड़ा की 137 वर्षों की साधना तब सफल हुई, जब सरयू तट स्थित ‘राम की पेड़ी’ पर इस मंडल ने तीन दिवसीय भव्य रामलीला का मंचन किया।
*​भावुक कर गया भरत-मिलाप, जमा रहा सीता स्वयंवर का आकर्षण*
​आयोजन के पहले दिन सीता स्वयंवर के प्रसंग ने दर्शकों को त्रेतायुग की भव्यता का अहसास कराया। वहीं, दूसरे दिन जब भरत-राम मिलाप का मंचन हुआ, तो कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। भाईचारे और त्याग के इस दृश्य ने अयोध्या के संतों और श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
*​सांसद विवेक बंटी साहू बने राजा जनक, अभिनय ने जीता दिल*
​इस आयोजन का मुख्य आकर्षण छिंदवाड़ा-पांढुर्णा सांसद विवेक बंटी साहू रहे, जिन्होंने राजा जनक की चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी विद्वतापूर्ण संवाद अदायगी और मर्यादित अभिनय ने रामलीला की गरिमा में चार चांद लगा दिए। जनक दरबार के दृश्यों में उनकी सहजता और गंभीरता की विशेषज्ञों ने भी सराहना की।
*​धर्म की विजय के साथ हुआ समापन*
​अंतिम दिन लक्ष्मण शक्ति, संजीवनी बूटी और रावण वध के प्रसंगों ने वीर रस का संचार किया। श्रीराम राज्याभिषेक के साथ ही पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक अवसर पर महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद गिरी, पूर्व सांसद लल्लू सिंह और हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
*​इनका रहा विशेष योगदान*
​अध्यक्ष अरविंद राजपूत के कुशल नेतृत्व और मुख्य निर्देशक पंडित वीरेंद्र शुक्ल की मंचीय दृष्टि ने इस आयोजन को वैश्विक स्तर का बनाया। संरक्षक कस्तूरचंद जैन, राजू चरणागर, सतीश दुबे, विनोद विश्वकर्मा और विजय आनंद दुबे के मार्गदर्शन ने इस आयोजन की सफलता की नींव रखी।
*​छिंदवाड़ा में भव्य स्वागत*
​अयोध्या फतह कर जब यह दल छोटी बाजार पहुंचा, तो ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के साथ कलाकारों का ऐतिहासिक स्वागत किया गया। यह केवल एक दल की वापसी नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा की सांस्कृतिक पहचान का सम्मान था।

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