उद्यानिकी विभाग की बड़ी पोल!

कागज़ों में ‘हरियाली’, जमीन पर ‘सूखा सच’ — करोड़ों का बजट आखिर किस अंधे कुएँ में गिर रहा है?

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रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बहुल्य जिले में उद्यानिकी विभाग का ‘हराभरा’ दावा अब एक बड़ा मज़ाक बन चुका है। विभाग की फाइलों में जहां खेत बाग-बगीचों से लहलहा रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत देखेंगे तो सिर्फ सूखा, झाड़ियाँ और उजड़ी उम्मीदें नज़र आती हैं।
किसानों का साफ कहना है—उद्यानिकी विभाग अब विकास नहीं, सिर्फ ढोंग उगा रहा है।
कागज़ में बाग—जमीन पर वीरानी: मंडला का असली सच!ग्रामीणों की शिकायतें विभाग की जड़ता की पूरी कहानी बयान करती हैं—
न कोई नया बागवानी प्रोजेक्ट
न प्रशिक्षण शिविर
न पौधे, न सब्सिडी
न कोई तकनीकी सहायता
इसके बावजूद विभाग की रिपोर्टों में “फलदार पौधों का वितरण”, “विस्तारित क्षेत्र”, “लाभान्वित किसान” जैसे चमकदार झूठ भरे रहते हैं।
जिन खेतों में विभाग ने बाग लगाना दिखाया है, वहां आज भूसे के ढेर और जंगली झाड़ियां खड़ी हैं।
करोड़ों का बजट—किसके पेट में जा रहा है?
हर साल उद्यानिकी योजनाओं पर लाखों-करोड़ों रुपये जारी होते हैं।
लेकिन न खेतों में खर्च का निशान है, न किसानों को लाभ।
जनता पूछ रही है:
पैसा कहां गया?
अगर योजना लागू नहीं हुई, तो राशि किसकी जेब में समाई?
इस ‘फर्जी हरियाली’ का मास्टरमाइंड कौन?
किस अधिकारी ने कागज़ी बागों का साम्राज्य खड़ा किया?
किसानों का आरोप है—90% योजनाएं सिर्फ कागज निगल रही हैं, जबकि विभाग मीटिंग, दौरे और ‘क्लेम रिपोर्ट’ में ही अपनी साल भर की खानापूर्ति कर लेता है।
विभाग की गहरी नींद, जनता का उबलता गुस्सा
मंडला के लोग अब उद्यानिकी विभाग को खुलेआम सबसे नाकारा, फेल और दिशाहीन विभाग बता रहे हैं।
किसान आय दोगुनी का सपना मंडला में हास्यास्पद प्रतीत होता है—क्योंकि विभाग खेतों में नहीं, फाइलों में फसलों की खेती कर रहा है। विभाग की सुस्ती ऐसी कि किसानों के खेत सूखते रहें, पर अधिकारी कुर्सी न छोड़ें—यही इसका फॉर्मूला बन चुका है।
जनता की कड़ी मांग—अब दिखावा नहीं, कठोर कार्रवाई चाहिए

मंडला की जनता अब सवाल नहीं, जवाब और सख्त कदम चाहती है:
हर ब्लॉक में उद्यानिकी योजनाओं की जांच कमेटी करोड़ों रुपये की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिकफर्जी रिपोर्टिंग करने वाले अधिकारियों का निलंबन
किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने वाला पारदर्शी सिस्टम
लोग साफ कह रहे हैं—
फाइलों में नहीं, खेतों में फूल चाहिए!”
बड़ा सवाल — आखिर मंडला कब जागेगा?
जब तक उद्यानिकी विभाग को कुर्सी से उठा कर खेतों में नहीं भेजा जाएगा, तब तक मंडला में:
योजनाएं फाइलों में ही फलती रहेंगी,खेत बंजर रहेंगे, किसान ठगे जाएंगेऔर विभाग भ्रष्टाचार का प्रतीक बना रहेगा।
अब सरकार को तय करना होगा
उद्यानिकी विभाग किसानों के लिए है, या सिर्फ अपने लिए?
अगर सिस्टम पर लगाम नहीं कसी गई,तो मंडला में बागवानी का भविष्य कागज के जंगल में ही दम तोड़ देगा, और किसान सूखे की मार झेलते रहेंगे।

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