वन्य जीव की पुष्टि को लेकर वेटनरी चिकित्सक पर, वन विभाग करंजिया द्वारा लागातार क्यों बनाया जा रहा है दबाव…

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रेवांचल टाइम्स डिंडोरी – मामला डिंडोरी जिले के वन परिक्षेत्र करंजिया पूर्व( सा.) का है जहां पर वन्य प्राणी के अवैध शिकार के मामले सामने आए थे सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इस मामले के जांच पशु चिकित्सक पर वन विभाग व पशुपालन विभाग डिंडौरी के प्रभारी उपसंचालक द्वारा पोस्ट मार्टम रिपोर्ट तैयार करने के लिए दबाव बनाया गया, जबकि पशु चिकित्सक के द्वारा नियम अनुसार सैंपल परीक्षण किया गया साथ ही वही लिखा जो मौके पर देखने को मिला और आगामी जांच के लिए नमूने इक्कठे किए गए और वन अधिकारी करंजिया को सुपुर्द किया ताकि लैब रिपोर्ट के साथ वन्य प्राणी की पहचान की जा सके चूकी जप्त सैंपल कई टुकड़ों में था इसलिए पशु चिकित्सक का कहना था की वन विभाग के द्वारा जप्त मास के टुकड़े जिसकी रिपोर्ट लैब रिपोर्ट आने के बाद ही पुष्टि की जाएगी कि मिले हुए सैंपल किस वन्य प्राणी के है, लेकिन वन विभाग के अधिकारी और पशुपालन विभाग के प्रभारी उपसंचालक की हठधर्मिता ऐसी की पशु चिकित्सक पर दबाव बनाने लगे ताकि वन्य प्राणी के पुष्टि कर रिपोर्ट तुरंत दे। इस पर पशु चिकित्सक ने वन विभाग के अधिकारी को बताया कि यह एक स्टैण्डर्ड प्रोसीजर है, हमे इसको पालन करना पड़ेगा । वन विभाग के अधिकारियों को इतनी जल्दी किस बात की थी, यह तो वही जाने, पर वन्य प्राणी के मास के अनेको टुकड़े हो पर मिला है तो इतनी आसानी से पुष्टि नियंम विरुद्ध है जबकि नियम यही कहता है कि सैंपल लैब भेज कर रिपोर्ट आने के बाद ही पुष्टि की जा सकती है अब सवाल उठता है कि वन विभाग करंजिया को इतनी जल्दी क्यों थी क्या जप्त मांस को लैब नहीं भेजना चाहती। और क्या सैंपल भेज कर लैब रिपोर्ट का इंतज़ार नहीं कर सकते थे क्या अब तक इसी तरीक़े से वन विभाग डिंडोरी काम करता आया है ये बड़ा सवाल है। कहि रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई से पर्दा न उठ जाए इस बात को लेकर वन अमला पशु विभाग के डॉक्टरों के ऊपर क्यों जल्दबाजी कर रहे है और लैब की रिपोर्ट का इंतजार क्यों नही किया जा रहा हैं।
वहीं पशुपालन विभाग के प्रभारी उपसंचालक पर भी बड़ा गंभीर सवाल उठता है जब आपके अधीनस्थ चिकित्सक ने मौके पर मिले मांस के आधार पर प्रथमद्रष्टया रिपोर्ट बना कर वन विभाग करंजिया को दे दिया गया था तो फिर शाम 5, 6, बजे जप्त नमूने का डिंडोरी से करंजिया जाकर पुनः परीक्षण करने की जरूरत क्यों पड़ी जो कि नियम विरुद्ध है जबकि नियम कहता है कि सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम या परीक्षण नहीं कर सकते । कही वन विभाग करंजिया के साथ साँठ- गाँठ तो नहीं ये जांच का विषय है। ये तो लेब रिपोर्ट आने के पाश्चय ही सच से पर्दा उठ सकेगा।

इनका कहना है*

प्राथमिक जांच में अवशेष देखकर पता चल रहा है की जंगली सूअर है. बाकी पुष्टि लैब से रिपोर्ट आने के बाद होगी!

रेंजर ब्लॉक करंजिया डिंडोरी

 

मैंने नियम अनुसार कार्यवाही कर दी है लैब रिपोर्ट आने के बाद पुष्टि कर दी जाएगी की सैंपल किस वन्य प्राणी का है ।

पशु चिकित्सक ब्लॉक करंजिया

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