गारंटी अवधि में ही सड़क के उड़ रहे परखच्चे, संधारण नदारद

गोपालपुर थाड़पथरा से पंडरीपानी मार्ग बदहाल, जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर

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रेवांचल टाइम्स बजाग – गोपालपुर थाड़पथरा मार्ग से पंडरीपानी को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की गारंटी अवधि वाली सड़क पांच वर्षों के भीतर ही बदहाली की शिकार हो गई है। हालात यह हैं कि सड़क की गिट्टियां उखड़ने लगी हैं, जगह-जगह पर सतह टूट चुकी है और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि यह सड़क अभी गारंटी अवधि में है, बावजूद इसके संधारण और मरम्मत का कोई काम होता दिखाई नहीं दे रहा।

यह मार्ग दर्जनों वनग्रामों को जोड़ता है और ग्रामीणों के लिए आवागमन का मुख्य साधन है। लगभग आठ किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण 115.24 लाख रुपये की लागत से किया गया था, जबकि सड़क के रखरखाव के लिए पांच वर्षों हेतु 101.62 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके बावजूद सड़क की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।

सड़क निर्माण एवं रखरखाव का कार्य दिव्या कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया है। यह सड़क पांच वर्ष की गारंटी वाली है। निर्माण कार्य की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी और रखरखाव दायित्व की अंतिम तिथि नवंबर 2026 निर्धारित है। गारंटी अवधि के भीतर ही सड़क की ऊपरी परत उखड़ना निर्माण गुणवत्ता और निगरानी दोनों पर सवाल खड़े करता है।

जानकारी के अनुसार, पांच वर्षों तक सड़क संधारण के तहत ठेकेदार को नियमित रूप से घास एवं झाड़ियों की कटाई, शोल्डर का संधारण, पॉटहोल व क्रैक भरना, पुल-पुलियों का संधारण, नालियों की सफाई एवं रखरखाव तथा पुलों की रेलिंग व दीवारों की पुताई जैसे कार्य करने होते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उक्त सड़क पर इनमें से कोई भी गतिविधि प्रभावी रूप से होती नजर नहीं आ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण आवागमन में दिक्कत, वाहन क्षति और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से शीघ्र ही सड़क सुधार की मांग की है जिससे आवागमन सुलभ हो सके ।

इस परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी महाप्रबंधक, मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण है, जबकि परियोजना इकाई (पीआईयू) डिंडोरी इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदार है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब करोड़ों रुपये संधारण के लिए स्वीकृत हैं, तो फिर गारंटी अवधि में ही सड़क क्यों जवाब दे रही है? क्या ठेकेदार की जवाबदेही तय होगी या फिर मामला कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा?

ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग और अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब तक संज्ञान लेते हैं और ग्रामीणों को एक सुरक्षित व टिकाऊ सड़क कब नसीब होती है।

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