अमृत काल में मंडला को कब मिलेगी नई दिशा…? इतिहास, संस्कृति और पर्यटन की धरोहर माहिष्मती नगरी

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अमृत काल में मंडला को कब मिलेगी नई दिशा…?

इतिहास, संस्कृति और पर्यटन की धरोहर माहिष्मती नगरी

रेवांचल टाईम्स – मंडला, भारतीय संस्कृति, पुरातत्त्व, धर्म और प्रकृति—चारों आयामों का अद्वितीय संगम मंडला जिला आज भी अपने व्यापक विकास की प्रतीक्षा में खड़ा है। देश के अमृत काल में, जब भारत के प्राचीन स्थलों का पुनर्जीवन प्राथमिकता से किया जा रहा है, तब मंडला जिला भी राष्ट्रीय स्तर पर अग्रिम पंक्ति में शामिल होने की क्षमता रखता है।
महिष्मति की पहचान से जुड़ा मंडला
मंडला जिले का ऐतिहासिक महत्व कोई नया विषय नहीं है। उन्नीसवीं सदी के प्रसिद्ध पुरातत्वविद अलेक्जेंडर कनिंघम और जॉन फेथफुल फ्लीट ने मंडला को प्राचीन महिष्मति नगरी के रूप में उल्लेखित किया है। यहां गोंडवाना साम्राज्य के प्राचीन महलों, मंदिरों, किलों और असंख्य पुरातात्विक अवशेषों की उपस्थिति इसकी ऐतिहासिक वैभवगाथा सिद्ध करती है।
सन 1912 में ब्रिटिश अधिकारी एफ.आर.आर. रूडमैन द्वारा प्रकाशित मंडला जिला गजेटियर में भी इस प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक महत्ता विशेष रूप से वर्णित है।
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अद्वितीय*
मंडला नर्मदा के पवित्र तट पर बसा है। सहस्त्रार्जुन कथा, नर्मदा परिक्रमा मार्ग और प्राचीन मंदिरों की श्रृंखला यहां के आध्यात्मिक परिवेश को और अधिक शक्तिशाली बनाती है। इसी कारण, स्थानीय नागरिकों ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध किया है कि मंडला में नर्मदा कॉरिडोर का निर्माण कर इसे राष्ट्रीय तीर्थ पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान प्रदान किया जाए।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान
विश्वप्रसिद्ध कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मंडला जिले की जैव-विविधता और पर्यटन महत्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है। यहां प्रतिवर्ष लाखों देशी–विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, परंतु मंडला में आधुनिक परिवहन सुविधाओं की कमी पर्यटन विस्तार में बड़ी बाधा है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार से दो बड़े प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं कान्हा–मंडला एयरपोर्ट का निर्माण इससे मंडला देश के प्रमुख तीर्थों और महानगरों से हवाई मार्ग द्वारा जुड़ सकेगा।
गोंडवाना साम्राज्य पर आधारित नेशनल म्यूजियम
मंडला आदिवासी इतिहास और गोंड संस्कृति का केंद्र है, इसलिए एक भव्य म्यूजियम इस धरोहर को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर सकता है।
रेलवे सेवाओं के विस्तार की मांग
मंडला जिले में व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है। परंतु मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन वर्तमान संरचना के कारण बड़ी दूरी की ट्रेनों को संभालने में सक्षम नहीं है। इसलिए नागरिकों ने भारतीय रेल मंत्रालय से मांग की है मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन पर कोचिंग डिपो का निर्माण, वॉशिंग पिट, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, लंबी दूरी की एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों की शुरुआत। स्थानीय नागरिकों के अनुसार विभिन्न रेलवे जोनों द्वारा मंडला से नई ट्रेनों की शुरुआत की जानी चाहिए, जिससे मंडला सीधे वाराणसी, हरिद्वार, उज्जैन, पुरानी दिल्ली, पुणे, अहमदाबाद, बैंगलोर, चेन्नई, भुवनेश्वर, नागपुर, भोपाळ, कोलकाता, अमरावती, रायपुर, हैदराबाद जैसे प्रमुख तीर्थों और महानगरों से जुड़ सके।

जल्दी जाग जाएंजनप्रतिनिधि

मंडला जिले को तीर्थ पर्यटन, पुरातत्व संरक्षण, व्यापार–व्यवसाय, परिवहन, और शिक्षा–चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाओं वाला जिला माना जाता है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि मंडला जिले का चतुर्विध धार्मिक–ऐतिहासिक–पर्यटन–कार्तिक विकास तत्काल प्राथमिकता में लाया जाए।

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