कौन सुनेगा जनता की फरियाद? जनसुनवाई बनी मज़ाक—निराकरण की पड़ताल को उठी उच्च स्तरीय जांच की मांग
कौन सुनेगा जनता की फरियाद?
जनसुनवाई बनी मज़ाक—निराकरण की पड़ताल को उठी उच्च स्तरीय जांच की मांग
रेवांचल टाईम्स – मंडला जिले में सीएम हेल्पलाइन से लेकर जनसुनवाई तक—सब कागज़ी औपचारिकता, समाधान धरातल पर शून्य
मंडला। जिले में हर मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई अब अपनी मूल भावना से भटकती जा रही है। जनसमस्याओं के त्वरित समाधान हेतु संचालित यह व्यवस्था अब लोगों के लिए औपचारिकता मात्र बनकर रह गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आवेदन तो हर हफ्ते लिए जाते हैं, पर समाधान कब और कैसे होता है—इसकी कोई सूचना तक नहीं दी जाती।
नागरिकों का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई, दोनों योजनाएँ मंडला जिले में पूरी तरह असफल हो चुकी हैं। समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं और परिपत्रों में “निराकरण” का टिक मार्क भर देने को ही कार्रवाई मान लिया जाता है।
गुमशुदगी व संदिग्ध मृत्यु का मामला—सबसे गंभीर, पर कार्रवाई का इंतज़ार
जनसुनवाई में सबसे महत्वपूर्ण आवेदन गुमशुदगी व संदिग्ध मृत्यु से जुड़ा रहा, जिसमें परिजनों ने कहा कि दो वर्षों से लगातार गुहार लगाने के बावजूद केवल “निराकरण” की औपचारिकताएँ दर्ज की जाती हैं, जबकि जमीनी जांच में कोई तेजी नहीं दिखाई देती।
जिले की वास्तविक तस्वीर—सब तरफ शिकायतें, पर विभागों की कार्यशैली सवालों के घेरे में
जनसुनवाई में इस सप्ताह जिन समस्याओं का अम्बार लगा, वे इस प्रकार रहीं—
अवैध नाव संचालन रोकने की मांग
असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई न होने की शिकायत
सड़क हादसों पर रोक हेतु यातायात सुधार की मांग
चोरी, सट्टा-जुआ व शराब बिक्री की शिकायत
बिजली-पानी व स्ट्रीट लाइट की बदहाल स्थिति
अवैध कब्जे व नालियों की सफाई
ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस गश्त की कमी
फसल बीमा व क्षति मूल्यांकन में गड़बड़ी
विभागीय लापरवाही और देरी को लेकर नागरिकों का रोष
इन सब शिकायतों से साफ है कि लगभग हर विभाग में समस्याएँ बढ़ रही हैं, और इसका सीधा मतलब है कि विभागीय कामकाज ठीक से नहीं चल रहा।
दो साल की जनसुनवाई की फाइलें खोल लो—सच्चाई खुद सामने आ जाएगी”
कई नागरिकों ने स्पष्ट कहा कि यदि पिछले दो वर्षों की जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन के आवेदन पत्रों का उच्च स्तरीय भौतिक सत्यापन कर लिया जाए, तो जिले में शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली की वास्तविक स्थिति उजागर हो सकती है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार—
निराकरण सिर्फ कागज़ों में
मैदान में कार्रवाई नहीं
न जांच, न फॉलोअप
और न ही आवेदकों को वास्तविक अपडेट
यही कारण है कि लोगों का भरोसा इन दोनों व्यवस्थाओं से उठता जा रहा है।
जनता का सीधा सवाल—सरकार कब उठाएगी कदम?
नागरिकों ने कहा कि मंडला जिले में समस्याएँ इतनी अधिक हैं कि हर सप्ताह जनसुनवाई में बड़ी संख्या में आवेदन पहुंचते हैं। यदि लगभग सभी विभागों की शिकायतें आ रही हैं, तो यह इस बात का प्रमाण है कि “काम सिस्टम के अनुसार नहीं, बल्कि सिस्टम के विपरीत हो रहा है
लोगों का कहना है कि—
“जनसुनवाई का मतलब केवल सुनवाई नहीं, समाधान भी होना चाहिए।”
सरकार कब तक हाथ पर हाथ धरकर बैठेगी, और कब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनसुनवाई सचमुच जनता की आवाज़ बने—ये सवाल अब हर नागरिक पूछ रहा है।
वही मंडला जिले में जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन की स्थिति चिंताजनक है। जनता की आवाज़ फाइलों में फंसी है और समाधान धरातल पर कहीं नहीं दिखाई देता। नागरिकों ने मांग की है कि जनसुनवाई व्यवस्था की उच्च स्तरीय जांच की जाए, ताकि जनहित के लिए बनी यह व्यवस्था फिर से अपने उद्देश्य पर लौट सके।