जुन्नारदेव नगर पालिका का नया कारनामा
*गंदी नाली में डाली गई पाइपलाइन, वर्षों से नाली के भीतर से मिल रहा पीने का पानी*
*अब इंदौर कांड के बाद शुरू हुआ राजनीतिक खेल*
*रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा*
नगर पालिका जुन्नारदेव की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के वार्ड क्रमांक 6, 7 और 8 के रहवासी कई वर्षों से गंदी नाली के भीतर से गुजर रही पाइपलाइन द्वारा पेयजल प्राप्त कर रहे हैं। यह गंभीर लापरवाही अब सामने आई है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस पाइपलाइन से घरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है, वह खुली और गंदी नाली के अंदर डाली गई है। बरसात के मौसम में नाली का गंदा पानी पाइप के संपर्क में आता है, जिससे जल प्रदूषण की आशंका लगातार बनी रहती है। हैरानी की बात यह है कि इस व्यवस्था को वर्षों तक नजरअंदाज किया गया।
जानकारी के अनुसार, यह विवादित पाइपलाइन पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष के कार्यकाल में उनके ही निवास के सामने डाली गई थी। लंबे समय तक वे स्वयं भी इसी नल का पानी उपयोग करते रहे, लेकिन तब इस पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई।
स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि पाइपलाइन को जानबूझकर नाली के उस हिस्से में डाला गया, क्योंकि यदि लाइन निर्धारित स्थान से डाली जाती तो अतिक्रमण की जद में आ जाता और उसे तोड़ना पड़ता। इसी कारण नियमों को ताक पर रखकर नाली के भीतर से पाइपलाइन निकाली गई, जो अब पूरे क्षेत्र के लिए मुसीबत बन गई है।
हाल ही में इंदौर में सामने आए जल प्रदूषण कांड के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिनके कार्यकाल में यह व्यवस्था बनी, वही पूर्व अब हाल-फिलहाल के पार्षदों, वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ से सवाल पूछते नजर आ रहे हैं। इसे लेकर क्षेत्र में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं और लोग इसे “राजनीतिक खेल” बता रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था गलत थी, तो वर्षों पहले क्यों नहीं रोकी गई? और यदि सही थी, तो अब अचानक इसे मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? जनता का आरोप है कि स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषय पर राजनीति की जा रही है, जबकि असली जरूरत समस्या के समाधान की है।
वार्ड 6, 7 और 8 के रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि
गंदी नाली से गुजर रही पाइपलाइन को तत्काल हटाकर नई सुरक्षित पाइपलाइन बिछाई जाए,
सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए,
और इस पूरे मामले में जिम्मेदार पूर्व व वर्तमान अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय की जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका जुन्नारदेव इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कार्रवाई करती है या मामला राजनीतिक बयानबाजी की भेंट चढ़ जाता है। जनता को अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल चाहिए।