बरसात में गिरे साल के पेड़ों की उपेक्षा, वन विभाग की उदासीनता से कीमती लकड़ी हो रही बर्बाद

पश्चिम करंजिया के पंडरी पानी वन क्षेत्र का मामला

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दैनिक रेवांचल टाइम्स ,बजाग – बरसात के मौसम में आंधी-तूफान और तेज बारिश के कारण पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी पानी क्षेत्र के जंगलों में बड़ी संख्या में साल के पेड़ जड़ सहित गिरे हुए हैं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी वन विभाग द्वारा उनकी कोई समुचित व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
मुख्य वन मार्ग और जंगल के अंदर जगह-जगह गिरे पड़े भारी भरकम साल के पेड़ आज भी लावारिस हालत में पड़े हैं। देखा जा सकता है कि सड़क किनारे और जंगल के भीतर कई पेड़ जमीन पर आड़े-तिरछे गिरे हुए हैं, जिससे न केवल वन मार्ग संकरा हो गया है बल्कि वन्य क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता भी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन गिरे हुए पेड़ों में कीमती जलाऊ और इमारती लकड़ी मौजूद है, जो या तो जंगल में ही सड़-गलकर नष्ट हो रही है अथवा लकड़ी माफियाओं के हत्थे चढ़ने का खतरा बना हुआ है। बावजूद इसके वन विभाग द्वारा न तो लकड़ी का संग्रहण किया जा रहा है और न ही उसका कोई वैधानिक उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ महीने उपरांत गर्मी का सीजन प्रारंभ होने वाला है और इस समय जंगलों में आग लगने का खतरा भी मंडराने लगता है ऐसे में जंगलों में बेतरतीब ढंग से पड़ी ईमारती पेड़ो सहित जलाऊ लकड़ियों का भी आग के हवाले हो जाने का खतरा है जिसके कारण शासन को लाखो रूपये की नुकसान होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

वन विभाग की इस लापरवाही और उदासीनता के कारण न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि भविष्य में अवैध कटाई और तस्करी की घटनाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है। यदि इन गिरे हुए पेड़ों की समय रहते नीलामी या व्यवस्थित उपयोग किया जाए तो विभाग को अच्छी-खासी राजस्व प्राप्ति हो सकती है।
वन अंचल के ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग जल्द से जल्द गिरे हुए साल के पेड़ों का सर्वे कर उचित प्रबंधन करे, ताकि वन संपदा की रक्षा के साथ-साथ सरकारी नुकसान को भी रोका जा सके।
इस संबंध में परिक्षेत्र सहायक अधिकारी को फोन लगाकर जानकारी चाही गई।परंतु उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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