*डिजिटल इंडिया का सपना हुआ साकार, तो सही में देश का हो जाएगा बेड़ा पार

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– लेखक :- प्रतीक संघवी राजकोट गुजरात

दैनिक रेवांचल टाइम्स – यह पंक्तियां भारत की डिजिटल क्रांति की भावना को बखूबी दर्शाती हैं। डिजिटल इंडिया मुहिम का उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना, सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन पहुंचाना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना था। दस साल बाद, 2026 की शुरुआत में, यह कार्यक्रम कई मील के पत्थर हासिल कर चुका है, लेकिन चुनौतियां भी बरकरार हैं। इस लेख में हम सरकार की अब तक की उपलब्धियां, आलोचनाएं और भविष्य के संभावित प्लान पर नजर डालेंगे, उदाहरणों के साथ।अगर सही में हम डिजिटल इंडिया का सपना साकार कर ले तो सब कुछ काम जो आज शीर दर्द बना हे वह सब चुटकियों मे हो जाएगा और सही में देश में एक नई क्रांति आ जाएगी जिसमें सब को डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग भी समान तरीके से करने का मौका मिले।

*सरकार की अब तक की मुहिम:*
उपलब्धियां और उदाहरण
डिजिटल इंडिया ने भारत को वैश्विक डिजिटल लीडर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम के तीन मुख्य स्तंभ – डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल गवर्नेंस और डिजिटल एम्पावरमेंट – पर फोकस करते हुए कई पहलें शुरू की गईं। 2025 तक की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मुहिम लगातार बढ़ रही है और कई क्षेत्रों में परिवर्तन ला रही है।

*इंटरनेट और कनेक्टिविटी का विस्तार*
2014 में मात्र 25 करोड़ इंटरनेट यूजर्स थे, जो 2024 तक 97 करोड़ से अधिक हो गए। भारत में अब दुनिया के सबसे सस्ते डेटा रेट्स हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहुंच बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर, भारतनेट प्रोजेक्ट के तहत 2.2 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया, जिससे रूरल-अर्बन डिजिटल डिवाइड कम हुआ। इससे 5 लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) स्थापित हुए, जो गांवों में ई-सेवाएं प्रदान करते हैं।

*डिजिटल पेमेंट्स और फाइनेंशियल इंक्लूजन*
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने क्रांति ला दी है। हर महीने 1.2 अरब से अधिक ट्रांजेक्शंस हो रहे हैं, जो विश्व में सबसे अधिक है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए 34 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचे, जिससे मध्यस्थों को हटाकर 2.7 लाख करोड़ की बचत हुई। उदाहरण: कोविड-19 वैक्सीनेशन में CoWIN ऐप ने 2 अरब से अधिक डोज ट्रैक किए, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UPI को एशिया-अफ्रीका में अपनाया जा रहा है।

*स्वास्थ्य, शिक्षा और ई-गवर्नेंस*:
आयुष्मान भारत हेल्थ आईडी से 50 करोड़ से अधिक नागरिकों को डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड मिले। PM eVidya के तहत 200 से अधिक टीवी चैनल्स और 775 ई-कंटेंट प्लेटफॉर्म्स से शिक्षा पहुंची। DigiLocker ने 7.5 अरब से अधिक दस्तावेज स्टोर किए, और GeM पोर्टल ने सरकारी खरीद को पारदर्शी बनाया। स्टार्टअप इकोसिस्टम में 1 लाख से अधिक स्टार्टअप्स रजिस्टर्ड हुए, जिसमें 114 यूनिकॉर्न शामिल हैं।

*ग्रामीण साक्षरता और अन्य पहलें*:
प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) ने 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों को डिजिटल साक्षर बनाया। कुल मिलाकर, 220 से अधिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स लॉन्च हुए, जो G20 में भारत की DPI को सराहना दिला रहे हैं।

ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि डिजिटल इंडिया ने न केवल अर्थव्यवस्था को बूस्ट दिया, बल्कि पारदर्शिता और समावेशिता बढ़ाई। 2025 में डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम और मजबूत हुआ, जिसमें UPI ने रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज की।

*चुनौतियां और उदाहरण*
डिजिटल इंडिया की सफलता के बावजूद, कई आलोचनाएं हैं जो इम्प्लीमेंटेशन, प्राइवेसी और समावेशिता पर सवाल उठाती हैं। ये मुद्दे बताते हैं कि सपना पूरी तरह साकार नहीं हुआ है।
*डिजिटल डिवाइड और इंफ्रास्ट्रक्चर डिले*:
ग्रामीण क्षेत्रों में 30% आबादी अभी भी विश्वसनीय इंटरनेट से वंचित है। भारतनेट प्रोजेक्ट का रोलआउट धीमा रहा, जिससे 80% लक्ष्य ही हासिल हो सके। उदाहरण: स्मार्ट सिटीज मिशन में 1.64 लाख करोड़ खर्च होने के बावजूद सिर्फ 18 शहरों में पूर्ण प्रोजेक्ट्स पूरे हुए, बाकी में अधर में लटके हैं। इससे प्रदूषण, कचरा प्रबंधन और बाढ़ जैसी समस्याएं बरकरार हैं।

*प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी इश्यूज*:
आधार सिस्टम पर प्राइवेसी की आलोचना बनी हुई है, जिसमें डेटा लीक और दुरुपयोग के मामले सामने आए। उदाहरण: सरकारी पोर्टल्स पर लॉगिन फेलियर से प्रोफेशनल्स को मन-आवर नुकसान हो रहा है, जो डिजिटल इंडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। साइबर क्राइम बढ़ गए, जैसे फ्रॉड और हैकिंग, जो डिजिटलाइजेशन के साइड इफेक्ट हैं।

*इम्प्लीमेंटेशन और अन्य मुद्दे*
लक्ष्यों में डिले, जैसे अनएम्प्लॉयमेंट 7.8% पर बरकरार। आलोचक कहते हैं कि नीतियों में स्पष्टता की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट धीमा है। उदाहरण: UID प्रोग्राम की आलोचना UK, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के नेगेटिव अनुभवों से की जाती है। ये आलोचनाएं बताती हैं कि तकनीकी प्रगति के साथ सामाजिक-आर्थिक असमानता को दूर करने की जरूरत है।

*आगे क्या प्लान होना चाहिए: भविष्य की राह*
डिजिटल इंडिया को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए मजबूत प्लान की जरूरत है। मौजूदा रोडमैप में डिजिटल इंडिया 2.0 पर फोकस है, लेकिन कुछ सुझाव हैं:
*इंफ्रास्ट्रक्चर और AI इंटीग्रेशन* 2026 तक डेटा सेंटर कैपेसिटी को 1,400 MW तक डबल करना, AI और हाइपरस्केल एक्सपैंशन पर जोर। प्लान: भारतनेट को पूरा कर रूरल ब्रॉडबैंड बढ़ाना और 6G रोलआउट की तैयारी।

*$1 ट्रिलियन डिजिटल इकोनॉमी* 2026 तक डिजिटल इकोनॉमी को $1 ट्रिलियन बनाने का लक्ष्य, जिसमें सोशल वेलफेयर, स्किल डेवलपमेंट और एजुकेशन पर फोकस। सुझाव: डिजिटल इंडिया एक्ट (2025) को लागू कर AI, IoT, ब्लॉकचेन और रोबोटिक्स को रेगुलेट करना।
*समावेशिता और सिक्योरिटी* डिजिटल लिटरेसी बढ़ाने के लिए PMGDISHA जैसे प्रोग्राम्स को विस्तार दें। प्राइवेसी लॉ मजबूत करें और साइबर सिक्योरिटी पर निवेश बढ़ाएं। सुझाव: ग्रामीण क्षेत्रों में फ्री Wi-Fi (PM-WANI) को बढ़ावा दें और डिजिटल डिवाइड को खत्म करने के लिए स्पष्ट टाइमलाइन्स सेट करें।

*इनोवेशन और ग्लोबल लीडरशिप*: स्टार्टअप्स को AI-ड्रिवेन सपोर्ट दें, जो 2026 में 1 अरब यूजर्स वाले मार्केट को पावर दे। प्लान: ह्यूमन सेंटर्ड अप्रोच रखें, जैसे Bhashini ऐप से भाषाई बैरियर्स हटाना।
अंत में, डिजिटल इंडिया का सपना साकार हो रहा है, लेकिन आलोचनाओं से सीखकर भविष्य के प्लान्स को मजबूत बनाने से ही देश का बेड़ा पार होगा। यह क्रांति तकनीक से ज्यादा, समावेशी विकास की कहानी है।
!!जय हिन्द!!

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