मंडला जिले में वाणिज्यकर विभाग टैक्स चोरी करने वालो पर नही हो रही कार्यवाही
टैक्स चोरी करने वालों को संरक्षण, शिकायतों पर एक साल से नहीं हुई कार्रवाई
मंडला।रेवांचल टाइम्स मंडला मध्यप्रदेश के मंडला जिले में वाणिज्यकर विभाग (GST विभाग) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में टैक्स चोरी से संबंधित कई शिकायतें सामने आने के बावजूद विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से यह संदेह गहराता जा रहा है कि टैक्स चोरों को विभागीय संरक्षण प्राप्त है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बीते एक वर्ष में विभाग को तीन से चार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन आज दिनांक तक न तो जांच पूरी की गई और न ही किसी दोषी पर कार्रवाई की गई।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडला जिले में कुछ ऐसे सप्लायर सक्रिय हैं जो फर्जी या रद्द (कैंसिल) किए जा चुके जीएसटी नंबरों का उपयोग कर शासकीय कार्यालयों में बिल लगाकर लाखों रुपये का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई मामलों में संबंधित जीएसटी नंबर वर्ष 2018-19 में ही निरस्त हो चुके हैं, इसके बावजूद इन नंबरों से बिल प्रस्तुत कर सरकारी खजाने से भुगतान लिया गया। यह न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है बल्कि इससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
शिकायतों के बावजूद मौन
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों को सभी आवश्यक दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ टैक्स चोरी की जानकारी दी थी। इसके बावजूद विभाग द्वारा न तो मौके पर जांच की गई और न ही संबंधित फर्मों के विरुद्ध कोई नोटिस जारी किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में लापरवाही बरत रहे हैं।
एक शिकायतकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “जब हमने टैक्स चोरी की शिकायत की तो हमें आश्वासन दिया गया कि जांच होगी, लेकिन महीनों बीत गए। आज तक न तो जांच रिपोर्ट सामने आई और न ही किसी पर कार्रवाई हुई। उल्टा टैक्स चोरी करने वाले पहले से अधिक निडर होकर काम कर रहे हैं।
फर्जी जीएसटी नंबरों का खुला खेल
सूत्र बताते हैं कि जिले में कुछ ऐसे कारोबारी हैं जो फर्जी जीएसटी नंबरों के माध्यम से बिलिंग कर रहे हैं। कुछ मामलों में ऐसे जीएसटी नंबरों का उपयोग किया जा रहा है जो पहले ही विभाग द्वारा रद्द किए जा चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इन बिलों को शासकीय कार्यालयों द्वारा भी स्वीकार किया जा रहा है और भुगतान भी किया जा रहा है।
यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जीएसटी पोर्टल पर सभी जानकारियाँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं, तो फिर रद्द जीएसटी नंबरों से जारी बिलों को कैसे मान्यता दी जा रही है। क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा जानबूझकर आँखें मूँद ली गई हैं या फिर इसके पीछे कोई गहरी सांठगांठ है?
शासन को हो रहा लाखों का नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच की जाए तो यह सामने आ सकता है कि शासन को जीएसटी के रूप में मिलने वाली बड़ी राशि का नुकसान हो रहा है। टैक्स चोरी का सीधा असर राज्य और केंद्र सरकार की आय पर पड़ता है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। इसके बावजूद यदि जिम्मेदार विभाग ही लापरवाही बरते या संरक्षण दे, तो यह पूरे सिस्टम पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि वाणिज्यकर विभाग में पदस्थ कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसे कार्य कर रहे हैं, जो विभागीय नियमों के विरुद्ध हैं। आरोप है कि टैक्स चोरी करने वालों से मिलीभगत कर अधिकारी अपनी निजी तिजोरी भरने में लगे हैं और शासन के हितों की अनदेखी कर रहे हैं।
यह भी कहा जा रहा है कि यदि कोई शिकायतकर्ता बार-बार शिकायत करता है तो उसे ही परेशान किया जाता है, जबकि दोषियों को संरक्षण दिया जाता है। इससे ईमानदार नागरिकों का शासन और प्रशासन पर से भरोसा कमजोर हो रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या जिला स्तर के अधिकारियों की इन गतिविधियों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं है, या फिर ऊपर तक सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद की जा रही हैं। यदि शिकायतें उच्च स्तर तक पहुँचाई गई हैं, तो अब तक कार्रवाई न होना कई संदेहों को जन्म देता है।जनता यह जानना चाहती है कि क्या दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई विभागीय या कानूनी कार्रवाई की जाएगी या फिर मामले को कागजों में दबाकर वरिष्ठ अधिकारी भी अपनी “अतिरिक्त आय” समेटने में लगे रहेंगे।
शिकायतकर्ता द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग
वाणिज्यकर विभाग में हुई कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जिन फर्मों द्वारा फर्जी जीएसटी नंबरों का उपयोग किया गया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और सरकारी धन की रिकवरी की जाए।
यदि समय रहते इस मामले पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल शासन की छवि को नुकसान पहुँचाएगा बल्कि ईमानदार करदाताओं के मन में भी निराशा पैदा करेगा।अब देखना यह है कि शासन और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या मंडला जिले में वाणिज्यकर विभाग की कार्यप्रणाली पर लगे इन आरोपों की सच्चाई सामने आ पाएगी या सब कागजो में चलता रहेगा।
इनका कहना
जब इस संबंध में वाणिज्यकर अधिकारी से फोन के माध्यम से उनका पक्ष जानना चाहा तो अधिकारी द्वारा कहाँ गया फोन पर ही जानकारी चाहिए अभी में मीटिंग में हूँ कहकर फोन काट दिया गया ।
सरिता भगत
वाणिज्यकर अधिकारी मंडला