जब प्रधानाचार्य ही लेटलतीफ, तो स्कूल में अनुशासन कैसे?

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मुंगवानी कला शासकीय हाई स्कूल में लापरवाही का बोलबाला, शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में
दैनिक रेवांचल टाइम्स | सिवनी
मुंगवानी कला स्थित शासकीय हाई स्कूल इन दिनों शिक्षा का मंदिर कम और अव्यवस्था का अड्डा अधिक बनता जा रहा है। विद्यालय की बदहाल स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब नेतृत्व ही लापरवाह हो, तो पूरी व्यवस्था कैसे चरमरा जाती है। इस विद्यालय में व्याप्त अराजकता का सीधा कारण प्रधानाचार्य रवि सिंह डहेरिया की घोर लापरवाही और शिथिल प्रशासन बताया जा रहा है।
15 जनवरी 2026 को जब दैनिक रेवांचल टाइम्स का प्रतिनिधि विद्यालय पहुँचा, तब सुबह 10:50 बजे तक विद्यालय में मात्र दो शिक्षक और तीन शिक्षिकाएँ ही उपस्थित थीं। आनन-फानन में उन्हीं के द्वारा प्रार्थना करवाई गई। इसके बाद न तो कक्षाओं में अनुशासन दिखा, न ही पढ़ाई का कोई माहौल।
प्रार्थना के बाद कुछ छात्र कक्षाओं में पहुँचे, जबकि अधिकांश छात्र परिसर में इधर-उधर भटकते रहे। शिक्षक भी पढ़ाने के बजाय कार्यालय और स्कूल परिसर में समय बिताते नजर आए। यह दृश्य किसी एक दिन का नहीं, बल्कि नियमित लापरवाही का प्रमाण है।
शिक्षक बेलगाम, प्रधानाचार्य बेबस या मौन?
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि प्रधानाचार्य द्वारा नियमित निरीक्षण और सख्ती न होने के कारण शिक्षक पूरी तरह मनमानी पर उतर आए हैं। कई शिक्षिकाएँ अपने छोटे बच्चों को विद्यालय लाकर पढ़ाई के समय उन्हें खिलाने-पिलाने और घुमाने में लगी रहती हैं। इससे कक्षाओं में शोर-शराबा रहता है और छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
यह स्थिति एक वर्ष से भी अधिक समय से जारी है, लेकिन प्रधानाचार्य द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
विद्यालय समय में चाय की चुस्कियां!
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई शिक्षक विद्यालय समय के दौरान बस स्टैंड और अन्य स्थानों पर घंटों चाय पीते हुए समय बिताते हैं। यह लापरवाही वर्षों से चल रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
यदि शिक्षा विभाग चाहे, तो ऑनलाइन उपस्थिति रजिस्टर और लोकेशन डेटा की जांच से सच्चाई स्वयं सामने आ सकती है। संवाददाता के पास उपलब्ध सीमित रिकॉर्ड में ही यह स्पष्ट हो गया कि कई शिक्षक 11:00 से 12:00 बजे के बीच विद्यालय पहुँचते हैं, जबकि नियमानुसार उन्हें कहीं पहले उपस्थित होना चाहिए।
प्रधानाचार्य का बयान ही बना आरोप
जब इस संबंध में प्रधानाचार्य रवि सिंह डहेरिया से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा—
“मैं तो रोज शिक्षकों को समय पर आने के लिए कहता हूँ, लेकिन वे मेरी बात नहीं मानते। ज्यादा बोलने पर मेरी ही शिकायत कर देते हैं।”
यह बयान अपने आप में पूरे मामले की जड़ उजागर करता है। जब प्रधानाचार्य स्वयं अनुशासन और समयपालन का उदाहरण प्रस्तुत नहीं करते, तो शिक्षकों और छात्रों से इसकी अपेक्षा करना केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के संकेत
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी एस.एस. कुमरे ने कहा—
“यदि इस संबंध में लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।”
प्रमुख तथ्य एक नजर में
▪ प्रधानाचार्य की लापरवाही से विद्यालय में अनुशासन ध्वस्त
▪ शिक्षक समय पर नहीं आते, कक्षाओं से दूरी
▪ शिक्षिकाओं द्वारा छोटे बच्चों को कक्षा में लाने से पढ़ाई प्रभावित
▪ विद्यालय समय में बस स्टैंड पर घंटों चाय पीने के आरोप
▪ ऑनलाइन उपस्थिति जांच से खुल सकती है पूरी सच्चाई
▪ वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं
निष्कर्ष
ग्रामीणों और अभिभावकों का साफ कहना है कि यदि प्रधानाचार्य ही अपने दायित्वों के प्रति गंभीर नहीं हैं, तो शिक्षक और विद्यार्थी नियमों का पालन क्यों करेंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
जब प्रधानाचार्य ही समय पर नहीं, तो शिक्षक और शिष्य कैसे समय पर?

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