भुआ बिछिया का बस स्टैंड बना सटोरियों का गड़ काउंटर लगाकर लिखाई जा रही है पट्टी, सट्टा का कारोबार चरम में, नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला मकड़जाल, जिम्मेदार कोन
रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले के थाना बिछिया में इन दिनों सट्टा का कारोबार गर्म है जहाँ थाना से महज़ 50 मीटर की दुरी में बस स्टेंड स्थित में जगह जगह काउंटर लगाकर पट्टी लिखाई जा रही है और सट्टा को लेकर नगर क्षेत्र फिर चर्चाओ में बना हुआ है, जहाँ अपना ग्रामीण अंचलों तक सट्टेबाजी का कारोबार फैला कर रखा हुआ है, जहाँ क़ानून व्यवस्था को लेकर चर्चा आम हो चुकी हैं, और इससे साफ नजर आ रहा है की पुलिस कितनी चुस्त है जो की थाने के पास ही चल रहें अबैध धंधे संचालित हो रहे है और वह अनजान है या फिर जानना नहीं चाह रही है इसके पीछे का क्या रहस्य है
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भुआ बिछिया के आसपास के क्षेत्र सट्टे में लिफ्त सक्रिय दिखाई पड़ रहे है और नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में पट्टी लिखने के लिए अपने गुर्गे बिठाल कर सट्टा पट्टी लिखाई जा रही है और दूरभाष से पट्टी लेकर उसे बिछिया में बैठे खाई बाज तक पहुँचाई जाने कीजानकारी लग रही हैं। और एक बार फिर सट्टे के अवैध कारोबार के सक्रिय होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय सूत्रों और क्षेत्रीय लोगों की मानें तो बिछिया नगर सहित आसपास के कई ग्रामीण इलाकों और कस्बों में सट्टा का कारोबार पूरे जोर-शोर से चल रहा है। बताया जा रहा है कि यह अवैध गतिविधि खुलेआम संचालित हो रही है, जिससे न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों पर इसका दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सट्टा कारोबारी तय समय और स्थान पर बैठकर मोबाइल फोन और पर्चियों के माध्यम से रोजाना लाखों रुपये का लेन-देन कर रहे हैं। सट्टे के अंक मोबाइल कॉल, मैसेज या अन्य माध्यमों से भेजे जाते हैं और पर्चियों पर हिसाब-किताब दर्ज किया जाता है। इस पूरे नेटवर्क में कई छोटे-बड़े सटोरिए शामिल बताए जा रहे हैं, जो बिछिया नगर सहित अलग अलग गांवों और कस्बों में सक्रिय नज़र आ रहें हैं।
वही स्थानीय लोगों का कहना है कि सट्टे की इस लत का सबसे ज्यादा असर युवाओं, मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोरो पर पड़ रहा है जहाँ काम धाम छोड़ कर अंको के गुना भाग करने और में लगे हुए है । एक के अस्सी बनाने के लालच में लोग अपनी मेहनत की कमाई सट्टे में झोंक रहे हैं। कई मामलों में देखा गया है कि लोग उधार लेकर या घरेलू जरूरतों के लिए बचाए गए पैसे भी सट्टे में लगा देते हैं, जिससे उनका आर्थिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है।
लोगों का कहना है कि सट्टा कभी किसी को अमीर नहीं बनाता। इतिहास गवाह है कि सट्टे में लंबे समय तक कोई भी व्यक्ति धनवान नहीं बन सका है। जो यह सोचता है कि वह सट्टे के जरिए जल्दी अमीर बन जाएगा, वह अंततः अपनी जमा-पूंजी भी गंवा बैठता है। सट्टे से वास्तविक लाभ सिर्फ खाईबाजों और कमीशन पर काम करने वालों को ही होता है, जबकि आम व्यक्ति सिर्फ नुकसान उठाता है।
सट्टे की वजह से क्षेत्र में पारिवारिक कलह, घरेलू विवाद और लड़ाई झगड़ों के मामलों में भी वृद्धि होने की बात कही जा रही है। कई परिवारों में आर्थिक तनाव के कारण आपसी संबंध खराब हो रहे हैं। मजदूर वर्ग, जो दिन-रात मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है, सट्टे की लत में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा देता है। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और अन्य जरूरी जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।युवा पीढ़ी पर भी इस अवैध कारोबार का गहरा असर देखा जा रहा है। जल्दी अमीर बनने के सपने में कई युवा पढ़ाई या काम पर ध्यान देने के बजाय सट्टे की ओर आकर्षित हो रहे हैं।लोगों का कहना है कि यह प्रवृत्ति आने वाले समय में सामाजिक समस्याओं को जन्म दे सकती है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो एक पूरी पीढ़ी गलत दिशा में जा सकती है।
हालांकि, स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि सट्टा कारोबारियों को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है, तभी वे बेखौफ होकर अपना धंधा चला रहे हैं। यदि ऐसा न होता, तो खुलेआम इस तरह का अवैध कारोबार संभव नहीं होता।
ग्रामीणों का कहना है सट्टा कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे लोगों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि सटोरियों को किसी न किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है।
सट्टा न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह समाज में अपराध, नशाखोरी और अन्य अवैध गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। इसलिए इसकी रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाए जाना जरूरी है। ताकि वे सट्टे के दुष्परिणामों कुल मिलाकर, बीजाडांडी और आसपास के क्षेत्रों में सट्टे का बढ़ता प्रभाव सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसके दुष्परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाते हैं।