धान परिवहन में बड़ा खेल!… निकटतम वेयरहाउस छोड़ दूर भेजी जा रही धान — सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप

24

 

अधिकारियों–परिवहनकर्ताओं की सांठ-गांठ से बढ़ाया जा रहा भाड़ा, जांच की उठी मांग

रेवांचल टाइम्स – मंडला।मंडला जिले में खरीफ उपार्जन के नाम पर एक और गंभीर अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि सरकारी तंत्र और परिवहनकर्ताओं की मिलीभगत से जानबूझकर धान को निकटतम वेयरहाउस में जमा न कर दूरस्थ वेयरहाउसों में भेजा जा रहा है, जिससे परिवहन भाड़े के रूप में सरकारी धन का सीधा दुरुपयोग हो रहा है। यह मामला केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई उपार्जन केंद्रों में इसी तरह की स्थिति बताई जा रही है।
मामला धान उपार्जन केंद्र लिंगापोड़ी से जुड़ा है। यहां से उमा वेयरहाउस की दूरी मात्र 1 से 1.5 किलोमीटर है, इसके बावजूद अधिकांश धान को 10 से 15 किलोमीटर दूर स्थित संगम वेयरहाउस, सुरक्षित वेयरहाउस, ओपन कैप सेमरखापा एवं मेकल वेयरहाउस फूलसागर तक भेजा जा रहा है। जानकारी के अनुसार उमा वेयरहाउस में अब तक लगभग 1 हजार क्विंटल धान ही पहुंचाई गई, जबकि शेष धान को दूरस्थ स्थानों पर भेज दिया गया।
दूरी बढ़ाकर बढ़ाया जा रहा परिवहन भाड़ा
निकटतम वेयरहाउस में धान जमा कराने पर परिवहन लागत न्यूनतम रहती, लेकिन दूर के वेयरहाउसों का चयन कर जानबूझकर परिवहन दूरी बढ़ाई गई, जिससे भाड़े का भुगतान कई गुना अधिक करना पड़ेगा। इस अतिरिक्त राशि का बोझ सीधे तौर पर सरकारी खजाने पर पड़ेगा। सवाल यह है कि जब पास में पर्याप्त क्षमता वाला वेयरहाउस उपलब्ध है, तो दूरस्थ वेयरहाउसों को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?
नियमों की अनदेखी, जवाबदेही तय नहीं
उपार्जन और परिवहन से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद इस तरह की कार्यप्रणाली प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। जानकारों का कहना है कि यदि पूरे जिले के खरीदी केंद्रों की जांच की जाए, तो इसी तरह के कई मामले सामने आ सकते हैं। इससे न केवल सरकारी धन का नुकसान हो रहा है, बल्कि पूरी खरीफ उपार्जन व्यवस्था की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में है।
जांच की मांग तेज
स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। मांग की जा रही है कि परिवहन आदेश, दूरी निर्धारण, भुगतान विवरण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह प्रशासनिक चूक है या सुनियोजित आर्थिक खेल।
यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो खरीफ उपार्जन योजना मंडला जिले में किसानों के हित की बजाय भ्रष्टाचार का माध्यम बनकर रह जाएगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.