ग्राम पंचायतों में जल संकट से निपटने की योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप

कुंटीददर गॉव पंचायत का मामला उजागर

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रेवांचल टाइम्स घुघरी गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से निपटने के लिए शासन द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर कुएं, तालाब, बोरी बंधान जैसे जल संरक्षण कार्यों के माध्यम से पानी को सहेजना और ग्रामीणों को राहत देना है, ताकि गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत उत्पन्न न हो। शासन स्तर पर इसके लिए पर्याप्त बजट और दिशा-निर्देश भी जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन उद्देश्यों से उलट नजर आ रही है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत घुघरी अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंटीददर में जल संरक्षण से जुड़े एक कार्य में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। मामला केवलार टोला के पूजा टोला में कराए गए कूप (कुएं) मरम्मत कार्य से जुड़ा हुआ है। यह कार्य 16 जून 2025 से 21 जून 2025 तक कराया गया बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार इस कूप मरम्मत कार्य में प्रतिदिन लगभग 8 से 9 मजदूरों ने काम किया, लेकिन पंचायत के कार्य रजिस्टर में 13 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। आरोप है कि जिन मजदूरों ने वास्तव में काम नहीं किया, उनके नाम से भी हाजिरी भर दी गई। इनमें गुलाब, मीराबाई और सुलोचना के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं, जिनके द्वारा कोई मजदूरी नहीं की गई, इसके बावजूद रजिस्टर में उनकी उपस्थिति दर्ज की गई।
इतना ही नहीं, इस कार्य में एक मामला बाल श्रम से जुड़ा भी सामने आया है। रीता, पिता रामनरेश, जिसकी उम्र मात्र 12 वर्ष रीता के पिता के द्वारा बताई जा रही है, उससे भी मजदूरी कराए जाने का आरोप है। शासन की योजनाओं में जहां बाल श्रम पूरी तरह प्रतिबंधित है, वहीं पंचायत स्तर पर इस तरह की लापरवाही और कानून का उल्लंघन कई सवाल खड़े करता है।
मजदूरी भुगतान को लेकर भी भारी अनियमितता सामने आई है। जून 2025 में किए गए कार्य की मजदूरी का भुगतान 16 जनवरी 2026 को किया गया, वह भी नगद रूप में। मजदूरों को 220 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 6 दिन की मजदूरी दी गई, जबकि अभी भी 6 दिन का भुगतान शेष बताया जा रहा है। नियमों के अनुसार मजदूरी का भुगतान समय पर और बैंक खाते के माध्यम से किया जाना चाहिए, लेकिन यहां नियमों की खुली अवहेलना की गई।
इस पूरे मामले में जब ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों से बात की गई तो बयान भी विरोधाभासी और जिम्मेदारी से बचने वाले नजर आए। ग्राम पंचायत के सरपंच कल्याण सिंह कुलेश ने बताया कि कूप मरम्मत का कार्य पंच मीराबाई के पति, जो कि पूर्व सरपंच रह चुके हैं, उनके द्वारा कराया गया है। सरपंच के अनुसार इस कार्य में लगभग 60 हजार रुपये की मजदूरी बनती है, जबकि मूल्यांकन मात्र 30 हजार रुपये का हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं कभी काम देखने नहीं गए और न ही उन्हें कार्य की वास्तविक स्थिति की जानकारी है।
वहीं पंचायत सचिव शेख असलम ने भी कार्य से दूरी बनाते हुए कहा कि वे भी मौके पर काम देखने नहीं गए। उनके अनुसार तकनीकी स्वीकृति (टीएस) रामचरण के द्वारा कराई गई थी। सचिव ने यह भी बताया कि मड़ई (स्थानीय आयोजन) के कारण मजदूर सरपंच के घर पहुंच गए थे, जिसके बाद सरपंच ने कहीं से उधार लेकर मजदूरों को पैसे दिए। सचिव का कहना है कि अभी तक विधिवत भुगतान नहीं हुआ है।
इन बयानों से स्पष्ट है कि पंचायत के जिम्मेदार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि इस कार्य की निगरानी और जवाबदेही लेने को तैयार नहीं दिख रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं को किस तरह मनमाने ढंग से चलाया जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में इस तरह का भ्रष्टाचार बिना किसी डर या भय के किया जा रहा है। आमजन जब शिकायत करते हैं तो जांच और कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। न तो दोषियों पर ठोस कार्रवाई होती है और न ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लग पाता है। इससे ग्रामीणों में अविश्वास का माहौल बनता जा रहा है।
जल संकट जैसी समस्या से निपटने के लिए चलाई जा रही शासकीय योजनाएं अगर इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहीं, तो उनका उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। आवश्यकता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार सरपंच, सचिव, उपयंत्री और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही मजदूरों का शेष भुगतान शीघ्र और नियम अनुसार किया जाए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच सके।

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