जिला मुख्यालय के मुख्य डाकघर में अव्यवस्थित पार्किंग बनी यातायात समस्या का कारण

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रेवांचल टाइम्स मंडला जिले की पहचान यदि किसी एक समस्या से जोड़ी जाए तो वह है अव्यवस्थित पार्किंग। जिले के लगभग सभी प्रमुख बाजारों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों के सामने सड़क पर खड़े वाहन आम दृश्य बन चुके हैं। दुकानों के सामने मनमाने ढंग से खड़े दोपहिया और चारपहिया वाहनों से आम नागरिकों को परेशानी होती ही है, साथ ही यातायात व्यवस्था भी लगातार प्रभावित होती रहती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुछ ऐसे स्थान भी हैं जहां पार्किंग की समुचित व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जा रहा।
ऐसा ही एक उदाहरण मंडला जिला मुख्यालय स्थित मुख्य डाकघर का सामने आया है।जिला मुख्यालय के इस प्रमुख डाकघर में पर्याप्त पार्किंग स्थल मौजूद है, इसके बावजूद उपभोक्ताओं के वाहन सड़क पर खड़े नजर आते हैं। सड़क के किनारे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे वहां से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर कोई ठोस ध्यान नहीं जा रहा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले की स्थिति इससे अलग थी। कुछ माह पूर्व तक डाकघर आने वाले सभी उपभोक्ताओं को अपने वाहन परिसर के अंदर बने पार्किंग स्थल में खड़े करने की अनुमति दी जाती थी। इससे सड़क पर अनावश्यक भीड़ नहीं होती थी और यातायात भी सुचारु रूप से चलता रहता था। लेकिन वर्तमान में, बिना किसी स्पष्ट कारण के, उपभोक्ताओं को अंदर वाहन ले जाने से रोका जा रहा है। नतीजतन, लोग मजबूर होकर अपने वाहन सड़क किनारे खड़े कर देते हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस समस्या की एक प्रमुख वजह डाकघर में कार्यरत कर्मचारियों का अनुभवहीन होना बताया जा रहा है। बताया जाता है कि डाकघर में कई नए कर्मचारी पदस्थ किए गए हैं, जिन्हें कार्य का पर्याप्त अनुभव नहीं है। काम की प्रक्रिया में धीमापन होने के कारण उपभोक्ताओं को लंबी-लंबी लाइनों में काफी समय तक खड़ा रहना पड़ता है। जब उपभोक्ता यह देखते हैं कि उनका काम जल्दी होने वाला नहीं है, तो वे अपने वाहन पास में ही सड़क पर खड़ा कर देते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर जल्दी निकल सकें।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि डाकघर की कार्यप्रणाली में सुधार न होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। बुजुर्ग, महिलाएं और दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। वहीं, सड़क पर खड़े वाहनों के कारण अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी निकलने में कठिनाई होती है।
कुछ नागरिकों ने यह आरोप भी लगाया है कि डाकघर प्रबंधन की ओर से पार्किंग को लेकर मनमानी की जा रही है। उनका कहना है कि यह कहीं न कहीं उच्च अधिकारियों की तानाशाही को दर्शाता है, जहां आम जनता की सुविधा के बजाय अपने आंतरिक नियमों को प्राथमिकता दी जा रही है। यदि पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है, तो उसका उपयोग जनता के लिए क्यों नहीं किया जा रहा।मुख्य डाकघर जैसे महत्वपूर्ण स्थान के सामने सड़क पर घंटों खड़े रहने वाले वाहनों पर न तो चालानी कार्रवाई होती है और न ही कोई स्थायी समाधान निकाला जा रहा है। इससे लोगों में यह संदेश जा रहा है कि नियम केवल आम नागरिकों के लिए हैं, जबकि सरकारी संस्थानों के आसपास अव्यवस्था को नजरअंदाज किया जा सकता है।
यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मंडला का मुख्य डाकघर अब कर्मचारियों के लिए एक प्रकार से “प्रशिक्षण केंद्र” बनकर रह गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां नए कर्मचारियों को पदस्थ कर दिया जाता है, और जब वे कार्य में परिपक्व हो जाते हैं, तो उन्हें किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाता है। इस निरंतर बदलाव का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है, क्योंकि हर बार नए कर्मचारियों को काम सीखने में समय लगता है।
आम जनता की मांग है कि डाकघर प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले और तत्काल समाधान निकाले। सबसे पहले, उपलब्ध पार्किंग स्थल को उपभोक्ताओं के लिए पुनः खोला जाए, ताकि सड़क पर खड़े वाहनों की समस्या खत्म हो सके। इसके साथ ही कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे कार्य की गति तेज हो और लोगों को घंटों लाइन में न खड़ा रहना पड़े।यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। जिला मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर इस तरह की अव्यवस्था न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि जिले की छवि को भी प्रभावित करती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक इस समस्या को नजरअंदाज करते हैं और कब आम जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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