मुंबई मैराथन में छिंदवाड़ा के रूपक मिगलानी की ‘हैट्रिक 42.195 किमी दौड़कर रचा इतिहास

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जितेन्द्र अलबेला

*रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा|हौसले बुलंद हों और इरादे फौलादी, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं होता। इस कहावत को एक बार फिर चरितार्थ किया है छिंदवाड़ा के गौरव, सीए रूपक मिगलानी ने। उन्होंने 18 जनवरी 2026 को प्रतिष्ठित ‘टाटा मुंबई इंटरनेशनल मैराथन’ में अपनी लगातार तीसरी जीत दर्ज कर ‘हैट्रिक’ पूरी की है।
​पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रखर वक्ता और लेखक रूपक मिगलानी ने 42.195 किलोमीटर की इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर न केवल अपनी शारीरिक क्षमता का लोहा मनवाया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर छिंदवाड़ा का नाम भी रोशन किया है।
*​”30 किलोमीटर के बाद शुरू होती है असली परीक्षा”*
​मैराथन पूरी करने के बाद विशेष चर्चा में रूपक मिगलानी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 42.195 किमी की दौड़ केवल शरीर की नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता की असली परीक्षा है। उनके अनुसार, “30 किलोमीटर तक दौड़ना एक तरफ है, लेकिन उसके बाद फिनिश लाइन तक का सफर अपने आप में एक नई मैराथन जैसा होता है। वहीं से आपकी मानसिक शक्ति का असली इम्तिहान शुरू होता है।”
​युवाओं को संदेश खेल से निखरती है क्षमता
​अपनी इस उपलब्धि को उन्होंने छिंदवाड़ा के युवाओं को समर्पित किया है। उन्होंने जिले के युवाओं से अपील की है कि वे दौड़ जैसे खेलों के लिए आगे आएं। उनका मानना है कि मैराथन जैसे खेल व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक, दोनों रूपों में सशक्त बनाते हैं और जीवन की चुनौतियों से लड़ने का अनुशासन सिखाते हैं।
*​उपेक्षा पर उठे सवाल* क्या उपलब्धियों का सम्मान केवल कागजों तक सीमित?
​जहाँ एक ओर रूपक मिगलानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंच पर छिंदवाड़ा का मान बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। खेल प्रेमियों और शहर के गणमान्य नागरिकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बावजूद, 15 अगस्त या 26 जनवरी जैसे गरिमामयी राष्ट्रीय पर्वों पर प्रशासन द्वारा उन्हें सम्मानित न किया जाना समझ से परे है।
​नगरवासियों का कहना है कि जब कोई प्रतिभा बिना किसी सरकारी मदद के अपने दम पर जिले का नाम रोशन करती है, तो उसे प्रोत्साहित करना शासन और प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है। क्या छिंदवाड़ा की इस प्रतिभा को उचित सम्मान मिलेगा? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

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