एनएच-30 पर जाम बना नई परंपरा, आम जनता भुगत रही खामियाजा
रेवांचल टाइम्स मंडला जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-30 पर आए दिन लगने वाले जाम अब एक समस्या का रूप लेते जा रहे हैं। छोटी-छोटी मांगों और स्थानीय समस्याओं को लेकर सीधे हाईवे जाम कर देना मानो विरोध का नया और आसान तरीका बन गया है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था ठप हो रही है, बल्कि आम जनता और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों से जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जब भी किसी समूह, संगठन या व्यक्तियों को कोई समस्या होती है, तो वे संबंधित विभागों या प्रशासनिक कार्यालयों तक जाने के बजाय सीधे एनएच-30 पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर देते हैं। परिणामस्वरूप घंटों तक वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। स्कूल बसें, यात्री वाहन, मालवाहक ट्रक और यहां तक कि एंबुलेंस भी जाम में फंसी नजर आती हैं।चिंताजनक बात यह है कि अब यह स्थिति अपवाद नहीं, बल्कि एक ट्रेंड बनती जा रही है। धरना-प्रदर्शन करने का यह अनोखा तरीका मंडला जिले में लगातार देखने को मिल रहा है। विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग को जाम करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को खुलेआम दरकिनार किया जा रहा है।सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट रूप से कह चुका है कि किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे आम नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। बावजूद इसके, न तो प्रदर्शनकारियों में कानून का भय दिखाई देता है और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर आ रही है। यही कारण है कि जाम लगाने वालों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है।हाईवे जाम का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। नौकरीपेशा लोग समय पर अपने कार्यस्थल नहीं पहुंच पाते, मरीजों को इलाज में देरी होती है और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि जाम के कारण न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि ईंधन खर्च भी बढ़ जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा।परेशान होते यात्रियों का कहना है यदि किसी को कोई समस्या है तो उसका समाधान संबंधित विभाग, जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए। हाईवे जाम करना न तो समाधान है और न ही न्यायसंगत तरीका। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वैकल्पिक धरना स्थलों की व्यवस्था की जाए और राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
यदि समय रहते इस बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन कानून का सख्ती से पालन कराए, ताकि एनएच-30 पर यातायात सुचारू रहे और आम जनता को राहत मिल सके।