धान स्लॉट बुकिंग बंद होने से प्रदेशभर में हाहाकार

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पोर्टल पर 13 जनवरी तक स्लॉट दर्शाया, लेकिन 9 जनवरी को ही बंद हुई बुकिंग

हजारों किसान परेशान, धान लेकर उपार्जन केंद्रों से लौटने को मजबूर

जगह-जगह ज्ञापन, सरकार पर किसानों को प्रताड़ित करने के आरोप

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर/भोपाल।

संपादक अतुल कुमार

मध्यप्रदेश में धान उपार्जन को लेकर सरकार की अव्यवस्थाओं ने किसानों की कमर तोड़ दी है। राज्य सरकार द्वारा संचालित धान स्लॉट बुकिंग पोर्टल पर जहां 13 जनवरी 2026 तक स्लॉट उपलब्ध होने की जानकारी प्रदर्शित हो रही थी, वहीं 09 जनवरी 2026 को ही अचानक स्लॉट बुकिंग बंद कर दी गई। इस अप्रत्याशित निर्णय से प्रदेश के लगभग सभी जिलों में हजारों किसान गंभीर संकट में फँस गए हैं।

धान बेचने के लिए पंजीयन करा चुके किसान स्लॉट बुकिंग की उम्मीद में अपने अनाज को उपार्जन केंद्रों तक लेकर पहुँचे, लेकिन स्लॉट न खुलने के कारण उन्हें धान वापस घर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे किसानों को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक तीनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

धान लेकर केंद्र पहुँचे, लेकिन ताले लगे मिले

प्रदेश के जबलपुर, मंडला, डिंडौरी, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर सहित अनेक जिलों से यह शिकायत सामने आई है कि किसानों ने पोर्टल पर प्रदर्शित तिथि को भरोसेमंद मानकर धान की कटाई, बोरी भराई, परिवहन और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च किए। लेकिन जब वे उपार्जन केंद्र पहुँचे तो स्लॉट बुकिंग बंद होने की जानकारी दी गई।

कई किसानों ने बताया कि उपार्जन स्थल पर धान रखने के बावजूद खरीद नहीं की जा रही, जबकि धान खुले में रखे-रखे खराब होने की आशंका बनी हुई है। कुछ जगहों पर तो किसानों को प्रशासन द्वारा स्पष्ट शब्दों में धान वापस ले जाने के निर्देश दे दिए गए।

 

हजारों किसानों की आजीविका पर संकट

धान मध्यप्रदेश के लाखों किसानों की मुख्य नकदी फसल है। स्लॉट बुकिंग बंद होने से न केवल धान की बिक्री रुकी है, बल्कि किसानों की पूरी आर्थिक योजना बिगड़ गई है। किसान खाद, बीज, डीज़ल, मजदूरी और कर्ज के भुगतान के लिए धान विक्रय पर निर्भर रहते हैं।

किसानों का कहना है कि

बैंक और साहूकार का दबाव बढ़ गया है

मजदूरी और परिवहन का पैसा फँस गया है

खुले में रखे धान के खराब होने का डर है

मानसिक तनाव और असुरक्षा की स्थिति बन गई है

 

 

सरकार पर मनमाने फैसलों के आरोप

किसानों और किसान संगठनों ने सरकार पर बिना पूर्व सूचना के मनमाने फैसले लेने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पोर्टल पर जब 13 जनवरी 2026 तक स्लॉट दर्शाया जा रहा था, तो 9 जनवरी को अचानक बुकिंग बंद करना किसानों के साथ धोखा है।

किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार एक ओर किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे फैसलों से किसानों को तोड़ने और प्रताड़ित करने का काम कर रही है। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और नीति विफलता का परिणाम है।

 

जिले-जिले में ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी

स्लॉट बुकिंग बंद होने के विरोध में प्रदेशभर में किसानों ने कलेक्टर, विधायक और सांसदों को ज्ञापन सौंपे हैं। कई जिलों में किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापनों में किसानों की प्रमुख माँगें हैं—

तत्काल धान स्लॉट बुकिंग पोर्टल दोबारा खोला जाए

सभी पंजीकृत किसानों का धान खरीदा जाए

स्लॉट बंद होने से हुए नुकसान की भरपाई की जाए

उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए

 

 

प्रशासनिक चुप्पी से बढ़ी नाराज़गी

इस पूरे मामले में अभी तक न तो खाद्य विभाग और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस और स्पष्ट जवाब सामने आया है। प्रशासनिक चुप्पी से किसानों में और अधिक रोष व्याप्त है।

किसानों का कहना है कि यदि सरकार समय रहते निर्णय नहीं लेती, तो यह संकट और गहराएगा। धान की खरीद में देरी से न केवल किसान बल्कि प्रदेश की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा।

 

किसानों की एक ही माँग—न्याय

इस समय मध्यप्रदेश का किसान न्याय की गुहार लगा रहा है। उसकी माँग सिर्फ इतनी है कि जो तिथि पोर्टल पर दिखाई गई, उसी के अनुसार उसे धान बेचने का अवसर दिया जाए। सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह तुरंत हस्तक्षेप कर इस गंभीर समस्या का समाधान निकाले, अन्यथा आने वाले दिनों में किसान आंदोलन और तेज हो सकता है।

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