पत्रकारिता के नाम पर गुंडागर्दी, पुलिस संरक्षण में फलते-फूलते स्वयंभू सोशल मीडिया के पत्रकार! वायरल ऑडियो ने खोली जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की पोल….. सुने वायरल ऑडियो
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन मंडला जिले में चौथे स्तंभ कहे जाने अब किस कदर सोशल मीडिया के गली-गली घूमने वाले स्वयंभू यूटयूब चैनल की माईक आईडी लिए या फिर वेबपोर्टल की माईक आईडी लिए लोगों मीडिया के नाम पर पैसा मांगना ख़बरों के बाइट के बहाने से बार बार फ़ोन करना जिस कारण से आम आदमी सहित अधिकारी कर्मचारीयो चौथे स्तम्ब कहे जाने वाले पत्रकारों को संदिग्ध नजरो से देखते नजर आ रहे और अब मीडिया की लाइन में तो अब कुछ ऐसे लोगो भी अपने आप को पत्रकारिता से जोड़ कर पत्रकार बतला रहे जो आये दिन सोशल मीडिया के वाट्सएप ग्रुपों में या फिर फेसबुक में मेटर डाल कर अपने आप को पत्रकार बन बैठे है कुछ तो ऐसे नाम भी सामने आ रहे जो सट्टा जुआ शराब या फिर किराये से वाहन चलाने के लिए पत्रकार बन बैठे है और पत्रकार दलालों और ठेकेदारों के हाथों बुरी तरह कलंकित होता नजर आ रहा है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि अब पत्रकारिता के नाम पर खुली धमकी, गाली-गलौज, दबंगई और कथित अवैध वसूली को भी प्रशासनिक मौन और पुलिस विभाग से संरक्षण मिल रहा है।
नैनपुर क्षेत्र में इन दिनों व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो ने पूरे सिस्टम को बेनकाब कर दिया है। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर स्वयंभू फेसबुकिया और व्हाट्सएप वाले दीपक शर्मा नाम के पत्रकार के द्वारा एक ट्रैक्टर मालिक को जिस तरह की भाषा का उपयोग करते हुए धमकाता जा रहा है, वह सीधे-सीधे कानून को चुनौती और पुलिस प्रशासन को कठपुतली साबित करता है।
ऑडियो में गालियां, धमकियां और सत्ता के नाम का दुरुपयोग इस कदर बेखौफ होकर किया गया है कि यह सवाल उठना लाज़मी है—
क्या ऐसे लोगों को पुलिस का खुला संरक्षण प्राप्त है?
क्या कानून इनके दरवाज़े पर जाकर दम तोड़ देता है?
कथित पत्रकार ऑडियो में, मंत्री, एसपी, आईजी, डीआईजी और थाना प्रभारी तक का नाम लेकर ट्रैक्टर मालिक को डराता सुनाई देता है। वह खुलेआम कहता है कि ट्रैक्टर अब नहीं चलेगा, यानी सीधे-सीधे एक आम नागरिक की रोज़ी-रोटी छीनने की धमकी। यह सिर्फ एक व्यक्ति को डराने का मामला नहीं, बल्कि पूरे जिले में भय का माहौल बनाने की साजिश प्रतीत होती है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि—
क्या जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं देता?
या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
जिले में गली-गली घूमने वाले तथाकथित सोशल मीडिया पत्रकार, जिनका न कोई पंजीकरण है, न कोई जवाबदेही, न कोई आचार संहिता—आज खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। और इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि पुलिस विभाग ऐसे तत्वों पर कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे यह संदेह और गहरा हो रहा है कि कहीं न कहीं इन्हें अघोषित संरक्षण प्राप्त है।
यदि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में कोई भी व्यक्ति मोबाइल और फेसबुक अकाउंट लेकर खुद को पत्रकार बताकर किसी भी आम नागरिक को धमकाएगा, गाली देगा और पुलिस का नाम लेकर डराएगा। तब सवाल उठेगा कि आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?
वायरल ऑडियो में ट्रैक्टर मालिक बार-बार “चाचा” कहकर मामला शांत करने की कोशिश करता सुनाई देता है, लेकिन कथित पत्रकार की दबंगई और अहंकार लगातार बढ़ता जाता है। यह दृश्य बताता है कि ताकत के नशे में चूर ऐसे लोग खुद को सिस्टम से ऊपर समझने लगे हैं।
हालांकि इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जो कुछ इसमें सुना जा रहा है, वह किसी भी सभ्य समाज, जिम्मेदार पेशे और कानून व्यवस्था के लिए खुली चुनौती है। यदि प्रशासन और पुलिस ने अब भी कठोर कदम नहीं उठाए, तो यह साफ संदेश जाएगा कि मंडला जिले में गुंडागर्दी को पत्रकारिता का लाइसेंस मिल चुका है।
अब वक्त आ गया है कि, जिला प्रशासन स्पष्ट करे कि ऐसे स्वयंभू सोशल मीडिया पत्रकारों की पहचान क्या है।
पुलिस प्रशासन बताए कि क्या इन्हें संरक्षण प्राप्त है या नहीं और यह तय किया जाए कि कानून सबके लिए बराबर है या कुछ लोगों के लिए सिर्फ नाम मात्र का।
यह मामला सिर्फ एक वायरल ऑडियो नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक करारा तमाचा है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्रकारिता की साख तो गिरेगी ही, साथ ही प्रशासन और पुलिस की निष्पक्षता पर भी स्थायी प्रश्नचिन्ह लग जाएगा।
नोट: सोशल मीडिया में वायरल ऑडियो की दैनिक रेवांचल टाइम्स पुष्टि नहीं करता।