नियमों को ताक पर रख ‘चहेते शिक्षक’ का जिला मुख्यालय में अटैचमेंट

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शासन के प्रतिबंध के बावजूद पूर्व सहायक आयुक्त का संरक्षण, अतिथि शिक्षक के भरोसे 42 बच्चों की प्राथमिक शाला

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला
आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में शिक्षा व्यवस्था इन दिनों ऐसे हाथों में दिखाई दे रही है, जहाँ शासन के आदेश महज़ काग़ज़ी साबित हो रहे हैं। नियमों को खुलेआम शिथिल कर अपने चहेते शिक्षकों को संरक्षण देने का खेल बदस्तूर जारी है—और इसकी कीमत चुका रहे हैं आदिवासी अंचल के मासूम बच्चे।

वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्तकालीन सहायक आयुक्त सन्तोष शुक्ला के कृपा पात्र और चहेतो को स्कूल से अपने सहायक आयुक्त कार्यालय में सभी नियमों शिथिल करते और अपना काननू चलाते हुए चहेते शिक्षकों को अपनी सेवाओं के लिए स्कूल छोड़ जिला मुख्यालय में बुला लिया गया और वह आज भी स्कूल को छोड़ जिला मुख्यालय में अपनी जड़ें जमाये दिखाई पड़ रहे है और वही दुसरी और जिले अधिकांश स्कूलों का बुरा हाल है जहा अथिति शिक्षकों के भरोसे से नवनिहाल बच्चों का भविष्य चल रहा है और जो रेगुलर शिक्षक है वह अधिकारी की कृपा पात्र बन मुख्यालय में मलाई छान रहे हैं वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ताज़ा मामला तहसील मुख्यालय घुघरी के ग्राम भुडकुर का है, जहाँ शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियमित शिक्षक को स्कूल से हटाकर सहायक आयुक्त कार्यालय मंडला में अटैच कर दिया गया। जबकि शासन द्वारा संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
42 बच्चों की ज़िम्मेदारी सिर्फ एक अतिथि शिक्षक पर
प्राथमिक शाला भुडकुर में वर्तमान में 42 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्कूल की पूरी जिम्मेदारी केवल एक अतिथि शिक्षक के भरोसे छोड़ दी गई है। नियमित शिक्षक की गैरमौजूदगी में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
सूत्रों के अनुसार, यह संलग्नीकरण पूर्व सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला के संरक्षण में किया गया था। बाद में शासन ने जब अटैचमेंट पर रोक लगा दी, तब भी उक्त शिक्षक को वापस स्कूल नहीं भेजा गया—जो सीधे-सीधे शासनादेश की अवहेलना है।
परीक्षा सिर पर, तब जाकर दूसरी नियुक्ति
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सत्र समाप्ति और 20 फरवरी से शुरू होने वाली परीक्षाओं के ठीक पहले, 14 जनवरी को एक और अतिथि शिक्षक (साहू जी) की नियुक्ति की गई। यह कदम शिक्षा सुधार से अधिक आपसी तालमेल और निजी स्वार्थ की ओर इशारा करता है।
अतिथि शिक्षक ने खोली पोल
रेवांचल टाइम्स की टीम से बातचीत में अतिथि शिक्षक धारवैया जी ने बताया—
“विवेक पाण्डे जी मंडला सहायक आयुक्त तत्तकालीन सन्तोष शुक्ला के जाने के पाश्चय अब भी वर्तमान सहायक आयुक्त बंदना गुप्ता के कृपा पात्र बनकर कार्यालय में अटैचमेंट चल रहा हैं और वही दूसरी ओर स्कूल का प्रभार भी उन्हीं के पास है। अभी साहू जी को 14 जनवरी से अतिथि शिक्षक के रूप में लगाया गया है।”
यह बयान साफ दर्शाता है कि नियमित शिक्षक मौजूद होते हुए भी स्कूल संचालन अतिथि शिक्षकों के भरोसे छोड़ा गया है।
ग्रामीणों में रोष
ग्रामवासी प्रताप सिंह ने कहा—
“स्कूल में सिर्फ एक मास्टर धारवैया जी दिखाई देते हैं। दूसरा कोई नहीं रहता। जनवरी में साहू जी को बुलाया गया है। गाँव में कोई मास्टर टिकता ही नहीं, ऐसे में बच्चों का भविष्य खतरे में है।”
प्रशासन जिम्मेदारी से बचता नजर आया
जब इस संबंध में बीआरसी अमित श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा—
“शासन द्वारा अटैचमेंट पूरी तरह बंद है। अगर कोई अटैचमेंट में है तो मुझे जानकारी नहीं है। आप बीईओ से बात कर लीजिए।”
वहीं, सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल लगातार बजता रहा—उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
जब शासन ने अटैचमेंट पर रोक लगा रखी है, तो शिक्षक किस आदेश से कार्यालय में जमे हैं?
क्या पूर्व अधिकारियों का संरक्षण शासनादेश से ऊपर है?
क्या आदिवासी अंचलों के बच्चों का भविष्य सिर्फ काग़ज़ों में पास दिखाने तक सीमित रह गया है?
अगर यही हाल रहा, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि मंडला में शिक्षा नहीं, बल्कि व्यवस्था की खुली हत्या हो रही है—और जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं।

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