संकल्प से समाधान अभियान सवालों के घेरे में जन समस्याओं का समाधान या सिर्फ कागजी औपचारिकता?
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जन समस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से शुरू किया गया “संकल्प से समाधान अभियान” मंडला जिले में अपेक्षित परिणाम देने में असफल नजर आ रहा है। जिले में यह अभियान समाधान से अधिक औपचारिकता बनकर रह गया है। सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते न केवल यह अभियान, बल्कि लगभग सभी शासकीय कार्यक्रम जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित नहीं हो पा रहे हैं।
अभियान के तहत प्रत्येक परिवार, प्रत्येक ग्राम और प्रत्येक नगर से आवेदन पत्र एकत्र कर समस्याओं के निराकरण का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में आवेदन संकलन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। नागरिकों को यह तक जानकारी नहीं मिल पा रही कि कहां-कहां अभियान के शिविर लगाए जा रहे हैं, किन क्षेत्रों में अभियान संचालित हो रहा है और किन क्षेत्रों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि कितनी समस्याओं का निराकरण हो चुका है और कितनी अभी लंबित हैं, इस संबंध में भी कोई सार्वजनिक व पारदर्शी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। अभियान से पूर्व नागरिकों को स्पष्ट सूचना न मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोग शिविरों और कार्यक्रमों से वंचित रह जा रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि मंडला जिले में शासन द्वारा संचालित अधिकांश अभियान और कार्यक्रम सिर्फ कागजों और फाइलों तक सीमित रह गए हैं। जमीनी स्तर पर न तो निगरानी हो रही है और न ही जवाबदेही तय की जा रही है, जिसका सीधा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।
जन अपेक्षा है कि प्रदेश सरकार मंडला जिले की इस स्थिति पर गंभीरता से संज्ञान ले, संकल्प से समाधान अभियान सहित सभी शासकीय कार्यक्रमों की निष्पक्ष समीक्षा कराए, पारदर्शिता सुनिश्चित करे और अभियानों को वास्तव में जनता की समस्याओं के समाधान का माध्यम बनाए—न कि केवल सरकारी औपचारिकता का।