आखिर कब होगी साक्षर भारत मिशन के शिक्षा प्रेरकों की बहाली

विधायक चैन सिंह ने विधानसभा में सरकार को घेरा

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दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में साक्षरता की अलख जगाने वाले शिक्षा प्रेरकों की अनदेखी अब विधानसभा की दहलीज पर पहुंच गई है। मंडला जिले की निवास विधानसभा सीट से विधायक चैन सिंह ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘साक्षर भारत मिशन’ योजना के तहत नियुक्त प्रेरकों की सेवा बहाली को लेकर जोरदार हमला बोला है। विधानसभा में तारांकित प्रश्न लगाकर उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से सवाल किया कि 2013 में बिना किसी लिखित आदेश के इन प्रेरकों को क्यों निकाला गया और अब तक उनकी सेवा बहाली क्यों नहीं की गई? इस कदम से मंडलाजिले के सैकड़ों बेरोजगार प्रेरकों में नई उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से संघर्षरत हैं।
योजना के तहत 2010-11 में मध्य प्रदेश की हर पंचायत में एक महिला और एक पुरुष शिक्षा प्रेरक की संविदा आधार पर नियुक्ति की गई थी। इन प्रेरकों को मात्र 2000 रुपये मासिक मानदेय मिलता था, लेकिन उनका योगदान ग्रामीण साक्षरता दर बढ़ाने में अहम रहा। अचानक 2013 में योजना बंद कर दी गई और प्रेरकों को बिना किसी औपचारिक आदेश या मुआवजे के बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। प्रेरक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि नियुक्ति पत्र लिखित थे, लेकिन निकाले जाने का कोई दस्तावेज नहीं। “हमने लगभग12 साल से ज्यादा समय से शासन-प्रशासन के दरवाजे खटखटाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जनप्रतिनिधि सोए रहे और सरकार ने आंखें मूंद लीं,
विधायक चैन सिंह की पहल को प्रेरकों ने ‘संजीवनी’ बताया है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ रोजगार का सवाल नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा की रीढ़ का मुद्दा है। साक्षर भारत मिशन में इन प्रेरकों ने गांव-गांव जाकर निरक्षरों को पढ़ाया, लेकिन सरकार ने उन्हें भुला दिया। विधायक का कहना है कि विधानसभा में इसकी जवाबदेही मांगूंगा और बहाली तक चुप नहीं बैठूंगा। ज्ञात हो ये प्रेरक अब भी गांवों में छोटे-मोटे काम करके गुजारा कर रहे हैं, लेकिन उनकी योग्यता और अनुभव बेकार जा रहा है।
जनता भी विधायक के इस कदम का स्वागत कर रही है। स्थानीय निवासी रामलाल पटेल ने कहा, “साक्षरता मिशन से हमारे गांवों में बदलाव आया था। प्रेरकों को वापस लाना जरूरी है, वरना ग्रामीण शिक्षा फिर पिछड़ जाएगी।” प्रेरक संघ अब विधायक के प्रयासों से उत्साहित है और उम्मीद कर रहा है कि जल्द ही सेवा बहाली का आदेश जारी होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो संघ बड़े आंदोलन की तैयारी में है।
सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विधानसभा में प्रश्न का उत्तर जल्द आने की उम्मीद है। यह मामला न केवल मंडला जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन सकता है, जहां हजारों संविदा कर्मी अनदेखी के शिकार हैं। क्या सरकार अब जागेगी या फिर प्रेरकों की उम्मीदें टूटेंगी? समय बताएगा। जन अपेक्षा है सरकार तत्काल साक्षर भारत मिशन के शिक्षा प्रेरकों की बहाली करें!

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