एकलव्य आवासीय विद्यालय में शिक्षक की हैवानियत, आदिवासी छात्र से बेरहमी से मारपीट

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एकलव्य आवासीय विद्यालय में आदिवासी छात्र से मारपीट
शिक्षक की हैवानियत, शिक्षा विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में

एकलव्य स्कूल में शिक्षक का तांडव, छात्र के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बहुल्य जिला मंडला, में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक का रैवैया छात्रों के साथ कैसा है ये बात आज किसी से छुपी नही है सरकारी स्कूलों के हालात आज बद से बत्तर होते दिखाई पड़ रहे है और जिला मुख्यालय से लेकर विकास खण्ड स्तर में बैठे जिम्मेदार अधिकारी मौन साध लिए है और स्कूलों में पदस्थ शिक्षक मनमानी करते नजर आ रहे और सब सरकारी स्कूलो में आदिवासी बच्चे आज सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं, महशूस कर रहे हैं खासकर उन स्कूलों में, जिन्हें आदर्श कहा जाता है।
ताज़ा मामला मंडला जिले के बिछिया विकासखंड स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय सिंझौरा का है, जहाँ पढ़ने वाले एक छात्र के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ शिक्षक छवि चौधरी और मनीष शर्मा ने छात्र को न सिर्फ प्रताड़ित किया, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की। यह कोई पहली शिकायत नहीं है—कुछ समय पहले इन्हीं शिक्षकों द्वारा प्रभारी प्रचार के साथ भी अभद्र व्यवहार की जानकारी सामने आ चुकी है, लेकिन तब भी शिक्षा विभाग ने आंखें मूंदे रखीं।
वही पीड़ित छात्र का कहना है कि व्हाट्सएप चैटिंग के दौरान उससे अनजाने में एक शब्द की गलती हो गई थी।
छात्र ने स्वयं शिक्षक से माफी भी मांग ली, लेकिन इसके बावजूद शिक्षक का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
छात्र का आरोप है कि उसके साथ मारपीट की गई धमकियां दी गईं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया
छात्र ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रभारी प्रचार को भी दी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सवाल यह है कि
क्या एकलव्य जैसे आवासीय विद्यालयों में
अब बच्चों की गलती की सज़ा मारपीट बन चुकी है?
प्रशासनिक औपचारिकता या कार्रवाई से बचने की कोशिश?
प्रभारी प्रचार ने मामले की जानकारी मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही है, लेकिन सवाल उठता है—
जब आरोप इतने गंभीर हैं, तो केवल नोटिस क्यों?
क्या शिक्षक को तत्काल निलंबित नहीं किया जाना चाहिए था?
क्या बच्चे की सुरक्षा से ज़्यादा विभाग की छवि ज़रूरी है?
राजनीतिक दल की एंट्री, फिर भी जवाब अधूरा
मामले की जानकारी लगते ही गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के सदस्य एकलव्य आवासीय विद्यालय पहुँचे और बच्चों से बातचीत की।
पार्टी सदस्यों का आरोप है कि
विद्यालय स्टाफ द्वारा उन्हें गुमराह करने की कोशिश की गई, और सच्चाई छुपाई जा रही है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कहा है कि
वे इस पूरे मामले को अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने रखकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
सबसे बड़ा सवाल
क्या आदिवासी बच्चों की आवाज़ इतनी कमज़ोर है कि शिक्षक उन्हें पीटकर भी बच जाएं?
क्या एकलव्य विद्यालय अब “आदर्श” नहीं, बल्कि डर का केंद्र बनते जा रहे हैं?
और क्या शिक्षा विभाग किसी बड़ी घटना का इंतज़ार कर रहा है?
प्रभारी प्रचार, नीरज पाठक
“मुझे जैसे ही जानकारी मिली, मैंने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।”
– प्रताड़ित छात्र
“मुझसे गलती हो गई थी, मैंने माफी भी मांगी थी। फिर भी मुझे मारा गया और धमकाया गया।”
प्रताड़ित छात्र
“हम डर के माहौल में रहते हैं, शिकायत करने पर भी कार्रवाई नहीं होती।”

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