कब शुरू होगा प्राकृतिक औषधि शोध केंद्र एवं आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला । आदिवासी बहुल मंडला जिला प्रकृति की अनमोल देन से समृद्ध है। यहां के घने वनों, पहाड़ियों और नर्मदा तट के आसपास औषधीय पौधों का अपार भंडार मौजूद है। बैगा, गोंड और अन्य जनजातीय समुदाय सदियों से इन प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से विभिन्न रोगों का इलाज करते आ रहे हैं। फिर भी, आजादी के 80 वर्ष बाद भी जिले में प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी और नेचुरोपैथी पर आधारित कोई विशेष शोध संस्थान या मेडिकल कॉलेज नहीं है। स्थानीय जानकारों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की एकजुट मांग है कि यहां प्राकृतिक औषधि शोध संस्थान सहित आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाए, ताकि स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग हो और क्षेत्र को स्वास्थ्य व रोजगार के नए अवसर मिलें।
मंडला जिला न केवल कन्हा नेशनल पार्क के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां के वन क्षेत्रों में 68 से अधिक औषधीय पौधों की प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जो खुजली, घाव, मधुमेह, जोड़ों के दर्द, अस्थमा, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियों में कारगर साबित होती हैं। आसपास के डिंडोरी, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा के वन क्षेत्र भी इसी तरह के औषधि भंडार से लैस हैं। आदिवासी वैद्य इन पौधों का उपयोग पारंपरिक तरीके से करते हैं, लेकिन आधुनिक शोध और प्रमाणिक शिक्षा की कमी से यह ज्ञान धीरे-धीरे लुप्त हो रहा है।
स्थानीय निवासी रामेश्वर सिंह बैगा बताते हैं, “हमारे बुजुर्ग जंगल से जड़ी-बूटियां लाकर कई गंभीर बीमारियां ठीक करते थे। आज लोग योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर लौट रहे हैं। कोरोना काल में भी आयुर्वेद ने बड़ी भूमिका निभाई। ऐसे में यहां कॉलेज बने तो स्थानीय युवाओं को पढ़ाई के साथ रोजगार मिलेगा और मरीजों को सस्ता, प्रभावी इलाज भी।
जानकारों का मानना है कि मंडला में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजकी स्थापना से न केवल जनजातीय क्षेत्र के स्वास्थ्य स्तर में सुधार होगा, बल्कि औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर हर्बल प्रोडक्ट्स का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास को बल मिलेगा। नागरिकों की मांग है कि शासन स्तर पर विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर जल्द इस दिशा में कदम उठाए जाएं।
उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंडला में मेडिकल कॉलेज के साथ आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने की घोषणा की थी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। लेकिन स्थानीय लोग प्राकृतिक शोध केंद्र और बहु-चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी) को एकीकृत करने वाली संस्था की मांग कर रहे हैं।
यह मांग जिले के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। उम्मीद है कि शासन प्रशासन इस जन अपेक्षा पर सकारात्मक विचार करेगा।