डिंडोरी में वन विभाग पीड़ित किसानों से मिला जयस प्रतिनिधि मंडल

रेवांचल टाईम्स – डिंडोरी जिला के करंजिया परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत जाड़ासुरंग के पोषक ग्राम बरेंडा में विगत सोमवार वन विभाग और जिला प्रशासन के द्वारा हथियारबंद पुलिस बल के मौजूदगी में ग्रामवासियों के घरों को जबरन उजाड़ दिया गया, उनके खेती की जमीनों को गड्ढा करके खेती से रोका जा रहा हैं| ग्रामीणों के द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने के बावजूद उनके साथ अत्याचार किया गया और द्वेषपूर्ण भावना से उनके घरों को तबाह कर दिया गया, बारिश के कारण ग्रामीण काफी मुश्किलों का सामना कर रहे है उनके सामने रोजी रोटी के साथ साथ छत की समस्या भी उत्पन्न हो गई है| वन विभाग की तरफ से कहा गया कि वे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रहे थे और इसी कारण उपरोक्त कार्यवाही की गई है|ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जानने के लिए जयस के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रपाल मरकाम के नेतृत्व में जिला अध्यक्ष नागेंद्र सिंह धुर्वे, संगठन मंत्री डिगम्बर सिंह पटटा, ब्लॉक अध्यक्ष अभिलाष श्याम, शाहपुरा प्रभारी सत्यप्रकाश धुर्वे, दिलीप उइके और अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे| ग्रामीणों के साथ चर्चा कर इंद्रपाल मरकाम ने कहा कि ग्रामीणों की समस्या को अपने स्तर से हर संभव समाधान करने का प्रयास किया जायेगा और सम्बंधित अधिकारियो से इस विषय मे वार्तालाप कर तुरंत निराकरण करने का प्रयास किया जायेगा|

पीढ़ियों से कर रहे हैं जमीन पर खेती
जयस प्रतिनिधि मंडल को ग्रामीणों ने बताया कि कब्ज़ा वाली जमीन पर ग्रामीण कईयो पीढीयों से खेती कर रहे हैं,वर्ष 2004 में संबंधित खेती की जमीन पर कब्जे के कारण किसानों का नागर और नांधा जोता जब्ती वन विभाग द्वारा की गई थी,2013 में झड़प और प्रशासन और वन विभाग के लोग मारा-पीटी भी किसानों के साथ किया था और मुकदमा दायर किया था जिसकी सुनवाई प्रक्रियाधीन है।
इनका कहना है
ग्रामीणों के साथ बैठक से पता चला है कि संबंधित जमीन पर किसान कई पीढ़ियों से खेती कर रहे हैं,जिसकी जानकारी वन विभाग को भी है वर्ष 2004 में नाधां,जोता भी वन विभाग ने जब्त किया था,वर्ष 2006 में वनाधिकार कानून वन-निवासी समुदायों को वन भूमि और संसाधन अधिकार प्रदान करके ऐतिहासिक अन्याय को ठीक करने का प्रयास करता है परंतु आज भी अन्याय जारी है ये सरकार की असफलता है जबकि 2005 के पहले का काबिज जमीनों पर पट्टा देने का प्रावधान है।प्रशासन द्वारा वनाधिकार के दावा देने का प्रयास प्राथमिकता और ईमानदारी से प्रयास नहीं किया गया,देवास में भी ऐसा ही मामला है यदि डिंडोरी वन विभाग और आदिम जाति कल्याण विभाग संबंधित पीड़ित किसानों को जल्द कब्जा के दावा पत्र पट्टा नहीं देती है तो जयस बड़ा आंदोलन करेगा 29 को देवास में इसका एक रूप देखा जा सकता है।
इंद्रपाल मरकाम
जयस प्रदेश अध्यक्ष