बीएमओ की दबंगई से थर्राया अस्पताल परिसर : इलाज में लापरवाही उजागर करने पर मरीज के पिता को दी धमकी, थाने में शिकायत

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बजाग बीएमओ पर मरीज के पिता को धमकाने का आरोप : थाने में हुई शिकायत

इलाज में लापरवाही बरतने तथा गलत रिपोर्ट देने पर सवाल करना पड़ा महंगा

पीलिया को बताया सामान्य रिपोर्ट

अस्पताल में लापरवाही का आलम,

बीएमओ पर पहले भी स्वेच्छाचारिता के लग चुके है आरोप

बजाग – नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करवाना अब मरीजों के लिए जोखिम भरा सौदा बनता जा रहा है। अस्पताल के बीएमओ विपिन राजपूत पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। इस बार एक मासूम बच्चे के इलाज में लापरवाही बरतने और गलत जांच रिपोर्ट देने की शिकायत लेकर पहुंचे पिता को डांट-डपटकर भगा दिया गया। हैरानी की बात तो ये रही कि जब पीड़ित ने जवाब तलब किया, तो बीएमओ ने न सिर्फ अभद्रता की, बल्कि कार्यवाही करने पर अंजाम भुगतने की धमकी तक दे डाली। पूरा मामला अब थाने की चौखट पर पहुंच चुका है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बजाग निवासी प्रदीप साहू ने 23 जून को अपने सात वर्षीय पुत्र प्रयाग साहू की तबीयत बिगड़ने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। डॉक्टरों द्वारा की गई जांच के बाद जो रिपोर्ट थमाई गई, उसे सामान्य बताकर उन्हें चलता कर दिया गया। लेकिन जब बच्चे की हालत नहीं सुधरी तो उन्होंने वही रिपोर्ट दूसरे चिकित्सक को दिखाई, जिन्होंने पीलिया होने की आशंका जताते हुए तत्काल डिंडोरी रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में तीन दिनों तक बच्चे का इलाज चला, जिससे यह साबित हो गया कि स्थानीय अस्पताल ने गंभीर लापरवाही की है।

पीड़ित पिता ने जब अस्पताल लौटकर बीएमओ से अपनी पीड़ा साझा की, तो बीएमओ बौखला उठे। रिपोर्ट में गड़बड़ी और इलाज में देरी पर सफाई देने की बजाय बीएमओ ने न सिर्फ मरीज के परिजन को धमकाया, बल्कि खुलेआम यह तक कह दिया कि “जहां जाना है, चले जाओ, जो करना है कर लो।” यह कोई पहला मामला नहीं है जब बजाग सीएचसी में मरीजों के साथ दुर्व्यवहार हुआ हो। इससे पहले भी अस्पताल में पदस्थ बीएमओ पर स्वेच्छाचारिता, बदसलूकी और मनमानी के आरोप लग चुके हैं।

अस्पताल बना दुर्व्यवहार का अड्डा, डॉक्टर नदारद – मरीज बेहाल
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों की मानें तो बीएमओ की सरकारी सेवा में खास रुचि नहीं है, उन्हें अपनी निजी प्रैक्टिस ज्यादा प्रिय है। ओपीडी में डॉक्टर तय समय पर उपलब्ध नहीं रहते, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। जवाब मांगने पर अक्सर मरीजों के साथ तीखे व्यवहार की खबरें आती हैं। अस्पताल की गिरती व्यवस्था से आमजन त्रस्त है और अब जनाक्रोश उबाल पर है।

बीएमओ की सफाई: ‘मेरा नाम खराब किया जा रहा है’
जब बीएमओ विपिन राजपूत से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, “मेरा नाम बदनाम किया जा रहा है, लगाए गए आरोप निराधार हैं।” हालांकि यह पहली बार नहीं है जब वे विवादों में घिरे हैं

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
एक ओर अस्पताल की व्यवस्थाएं लगातार सवालों के घेरे में हैं, दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। थाने में शिकायत पहुंचने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जो स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

अब सवाल यह है कि….. क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? या फिर एक और मामला फाइलों की धूल में दब जाएगा?

 

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