रेवांचल टाइम्स मंडला। शहर में नगरपालिका और राजस्व अमले की कथित सुस्ती के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। ताजा मामला ज्वाला जी वार्ड, महाराजपुर स्थित खसरा नंबर 128 की गौठान भूमि का है, जहां सार्वजनिक उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पत्रकारों संघ द्वारा पौधारोपण किया गया था। पौधों की सुरक्षा के लिए संघ ने फेंसिंग कराई थी और नगरपालिका के द्वारा गेट भी लगवाए थे, लेकिन असामाजिक तत्वों ने फेंसिंग तोड़कर पौधों को नुकसान पहुंचा दिया। शिकायतों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमणकारी खुलेआम झोपड़ी खड़ी कर पक्का निर्माण करने की तैयारी में जुटे हैं।स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अतिक्रमण की सूचना कई बार संबंधित विभागों को दी गई, परंतु कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिलता रहा। पहले फेंसिंग तोड़ी गई, फिर पौधों को नष्ट किया गया और अब उसी भूमि पर झोपड़ी डाल दी गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती दिखाई जाती तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। मौजूदा हालात में अतिक्रमणकारी अंदर ही अंदर पक्का निर्माण की फिराक में हैं, जिससे सरकारी भूमि पर स्थायी कब्जे की आशंका गहरा गई है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आशंका यह भी जताई जा रही है कि बाद में नगरपालिका के कुछ कर्मचारी द्वारा वर्षों का मकान कहकर वसूलकर रसीद थमा देंगे, जिसके आधार पर अतिक्रमणकारी पट्टे की दावेदारी ठोकते हुए न्यायालय की शरण ले सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो सरकारी भूमि को मुक्त कराना और भी जटिल हो जाएगा। यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।गौरतलब है कि गौठान भूमि का उपयोग पारंपरिक रूप से पशुधन और सामुदायिक गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में इस पर अतिक्रमण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामुदायिक हितों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर भी सीधा प्रहार है। पौधारोपण जैसी सकारात्मक पहल को नुकसान पहुंचाना और प्रशासन का मूकदर्शक बने रहना, दोनों ही चिंताजनक हैं।
शहर के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि तत्काल मौके में पहुंच कर अतिक्रमण हटाया जाए, दोषियों पर प्रकरण दर्ज हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए। यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा तो मंडला में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की बाढ़ आ सकती है। सवाल यह है कि आखिर कब तक जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे रहेंगे और अतिक्रमणकारी कानून को चुनौती देते रहेंगे।