सिकोसी की आंगनवाड़ी निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, गुणवत्ता पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला ग्राम पंचायत सिकोसी मेंनिर्माणाधीन आंगनवाड़ी भवन अब सवालों के घेरे में है। छोटे बच्चों और महिलाओं के उपयोग के लिए बनाए जा रहे इस भवन की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने खुलकर नाराज़गी जताई है। आरोप है कि निर्माण कार्य न केवल लंबे समय से अधूरा पड़ा है, बल्कि अब तक जो कार्य हुआ है वह भी मानकों पर खरा नहीं उतर रहा।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार कि निर्माण स्थल की स्थिति देखकर ही गुणवत्ता की हकीकत समझी जा सकती है। मौके से सामने आई तस्वीरों में दीवारों पर जगह-जगह सीमेंट उखड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। बीम और कॉलम में गिट्टी बाहर झांक रही है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कंक्रीट का मिश्रण मानक अनुसार नहीं किया गया। कई हिस्से बेहद कमजोर नजर आ रहा है और कुछ स्थानों पर ईंटें खुली दिखाई दे रही हैं।, जो भवन की मजबूती पर प्रश्न खड़े करती है।
अधूरा निर्माण, बढ़ती चिंता
ग्रामीणों के अनुसार, आंगनवाड़ी भवन का निर्माण कार्य कई महीनों से सुस्त गति से चल रहा है। कभी मजदूर नहीं आते तो कभी सामग्री की कमी का बहाना बनाया जाता है। इस बीच जो निर्माण हुआ है, उसकी गुणवत्ता को लेकर भी असंतोष है। लोगों का कहना है कि यदि प्रारंभिक अवस्था में ही निर्माण की यह हालत है तो भविष्य में भवन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और टीकाकरण जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों का केंद्र होता है। यहां प्रतिदिन छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं आती हैं। ऐसे में यदि भवन की संरचना कमजोर होगी तो किसी भी समय हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो सकती है।
घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उनका कहना है कि सीमेंट और रेत का अनुपात सही नहीं रखा गया, जिसके कारण कंक्रीट कमजोर नजर आ रहा है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण में मानक से कम लोहे का उपयोग किया गया है।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सब इंजीनियर और पंचायत स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह स्थिति बनी है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण होता और गुणवत्ता की जांच की जाती तो निर्माण की यह स्थिति सामने नहीं आती।
मिलीभगत की आशंका
कुछ ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि निर्माण कार्य में पंचायत स्तर पर मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि कार्य की मॉनिटरिंग कागजों में पूरी दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। यदि निर्माण मानकों के अनुसार हुआ होता तो बीम और कॉलम से गिट्टी बाहर नहीं दिखाई देती
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को नियमित रूप से निरीक्षण करना चाहिए। लेकिन यहां ऐसा प्रतीत होता है कि कार्य की निगरानी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्राम पंचायत सिकोसी के ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि किसी बाहरी तकनीकी विशेषज्ञ या उच्च स्तरीय टीम से गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में लापरवाही या घटिया निर्माण की पुष्टि होती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही अधूरे निर्माण कार्य को तत्काल रोककर मानक अनुसार दोबारा कराया जाए।
अब यह मामला प्रशासन के लिए परीक्षा बन गया है। सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेगा या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा
आंगनवाड़ी भवन केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। यदि शुरुआत में ही गुणवत्ता से समझौता किया जाएगा तो इसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मुद्दे को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाएंगे। फिलहाल पूरे गांव की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी जांच कर सख्त कदम उठाते हैं या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाता है।