कबाड़ के पहाड़ और ‘अंधा’ सिस्टम! डुण्डासिवनी में किसकी सरपरस्ती में फल-फूल रहा अवैध कारोबार?
सड़क किनारे मौत का सामान, प्रशासन खामोश — आखिर जिम्मेदार कौन?
दैनिक रेवांचल टाइम्स – सिवनी।डुण्डासिवनी थाना क्षेत्र इन दिनों कबाड़ के बढ़ते साम्राज्य के कारण बड़े सवालों के घेरे में है। सड़क किनारे लगे कबाड़ के पहाड़ न केवल सिस्टम की कार्यशैली की पोल खोल रहे हैं बल्कि यह भी संकेत दे रहे हैं कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा नेटवर्क खड़ा होना संभव नहीं। सवाल सीधा है — क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
शहर के प्रमुख मार्गों और खाली पड़ी जमीनों पर खुलेआम जमा कबाड़ कानून को खुली चुनौती देता नजर आ रहा है। यातायात प्रभावित हो रहा है, आगजनी का खतरा हर पल मंडरा रहा है, पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है — लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा क्यों?
स्थानीय लोगों में चर्चा तेज है कि कबाड़ की आड़ में वाहनों की कटिंग का खेल भी चल रहा है।
अगर ऐसा नहीं है तो —
➡ क्या इन कबाड़ स्थलों का पुलिस सत्यापन हुआ?
➡ क्या इनके पास वैध लाइसेंस हैं?
➡ क्या परिवहन और नगर पालिका ने कभी संयुक्त कार्रवाई की?
➡ क्या पर्यावरणीय मानकों का पालन हो रहा है?
अगर जवाब “हाँ” है तो जमीन पर अव्यवस्था क्यों?
और अगर जवाब “नहीं” है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
यह पूरा मामला केवल अवैध कबाड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। कबाड़ के इन ढेरों में ज्वलनशील पदार्थ, कटे-फटे वाहन और तेल-ग्रीस जैसे तत्व मौजूद रहते हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?
सिवनी जिला में तेजी से फैलता यह कबाड़ कारोबार कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। थाना, राजस्व, नगर पालिका, परिवहन और प्रदूषण नियंत्रण — आखिर जिम्मेदारी किसकी है? या फिर सबकी चुप्पी ही इस खेल की सबसे बड़ी ताकत है?
जनता पूछ रही है —
किसके संरक्षण में चल रहा यह कबाड़ का काला खेल?
क्यों नहीं हो रही संयुक्त जांच?
क्यों नहीं जब्त हो रहा अवैध कबाड़?
क्यों नहीं हो रही एफआईआर और सीलिंग की कार्रवाई?
अब शहर को दिखावे की नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए।
पारदर्शी जांच हो…
अवैध कबाड़ जब्त हो…
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो…
ताकि कानून का डर नजर आए और सिवनी की सड़कों से कबाड़ के इन खतरनाक पहाड़ों का साम्राज्य खत्म हो सके।