मनरेगा खेल मैदान में महाघोटाले की बू — जनपद सीईओ से लेकर सरपंच-सचिव तक सवालों के घेरे में

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मनरेगा योजना में संगठित लूट! बीजाडांडी जनपद का पूरा अमला कटघरे में

दैनिक रेवांचल टाइम्स,- मंडला।मंडला जिला की जनपद पंचायत बीजाडांडी में मनरेगा के खेल मैदान निर्माण के नाम पर बड़ा खेल होने की आशंका गहराने लगी है। सामग्री कार्यों पर रोक के बावजूद गुपचुप तरीके से काम शुरू कराए जाने से पूरे अमले की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।
सीईओ की चुप्पी, उपयंत्री की मेहरबानी — खेल मैदान बना भ्रष्टाचार का मैदान
सरपंच-सचिव से जनपद तक सेटिंग का खेल, बिना रॉयल्टी दौड़ रही मुर्रम
रोक के बीच काम चालू, भुगतान की तैयारी मनरेगा योजना बना ‘कमाई गारंटी योजना’
वही सूत्रों का दावा है कि बिना स्वीकृत खदान, बिना रॉयल्टी और बिना वैधानिक प्रक्रिया के मुर्रम डलवाई जा रही है, जिससे साफ है कि यह काम किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी चेन की मिलीभगत से संचालित हो रहा है।

जनपद सीईओ की चुप्पी पर खड़े हो रहे बड़े सवाल

वही जनपद स्तर पर हो रहे इन कार्यों की जानकारी के बिना भुगतान संभव नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जनपद सीईओ की मौन स्वीकृति से काम हो रहा है?
या फिर निगरानी तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है?
सरपंच-सचिव और रोजगार सहायक की भूमिका संदिग्ध
ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य प्रारंभ करने की अनुमति मस्टर रोल जारी करना
सामग्री की एंट्री माप पुस्तिका तैयार करना
इन सबकी जिम्मेदारी सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की होती है। इसके बावजूद नियम विरुद्ध काम शुरू होना सीधे-सीधे उनकी भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।

उपयंत्री और एसडीओ पर तकनीकी मिलीभगत के आरोप
तकनीकी स्वीकृति और माप के बिना भुगतान संभव नहीं है।
आरोप है कि:
बिना साइट निरीक्षण कार्य चालू
गुणवत्ता और मात्रा की अनदेखी
फर्जी माप पुस्तिका की तैयारी की भूमिका
उपयंत्री और एसडीओ की संलिप्तता की ओर इशारा कर रहे हैं।
मुर्रम का रहस्य — अवैध उत्खनन या फर्जी बिलिंग?
क्षेत्र में स्वीकृत खदान नहीं होने के बावजूद पाथाचोरी, लावार, बरगंदा, विजयपुर सहित कई स्थानों पर मुर्रम डलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
क्या खनिज विभाग की मिलीभगत है?
क्या राजस्व अमला भी शामिल है?
या फिर अवैध उत्खनन से सरकारी राशि का बंदरबांट हो रहा है?
अप्रैल से पहले बिल लगाने की हड़बड़ी क्यों?
सूत्रों के अनुसार रोक हटने से पहले ही कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान निकालने की तैयारी है, जिससे घोटाले की आशंका और गहरा गई है।
अगर जल्द जांच नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन
वही स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि:
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच
स्वीकृत खदानों और रॉयल्टी की जांच
तकनीकी अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल नहीं हुई तो जनआंदोलन किया जाएगा।

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