पहले बिकी ज़मीन, फिर जागी व्यवस्था: तुईयापानी में अवैध प्लॉटिंग पर FIR, जिम्मेदारी पर सवाल
तुईयापानी में अवैध प्लॉटिंग का खेल उजागर
पहले बिके प्लॉट, फिर जागा प्रशासन — तीन कॉलोनाइजरों पर FIR
बड़ा सवाल: जनता की जेब कटने के बाद ही क्यों होती है कार्रवाई?
दैनिक रेवांचल टाइम्स | नैनपुर, जिला मंडला | 16 मार्च 2026नैनपुर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों और भू-माफियाओं का फैलता जाल आखिरकार प्रशासन की नजर में आ ही गया, लेकिन तब जब कई लोगों की मेहनत की कमाई दांव पर लग चुकी थी। ग्राम तुईयापानी (पिण्डरई) में कृषि भूमि पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के प्लॉट काटकर बेचने के मामले में प्रशासन ने अब जाकर कार्रवाई करते हुए तीन कथित कॉलोनाइजरों के खिलाफ थाना नैनपुर में FIR दर्ज कराई है।

प्रशासन ने संबंधित खसरों को ब्लॉक कर खरीदी-फरोख्त पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब महीनों से अवैध प्लॉटिंग का खेल खुलेआम चल रहा था, तब जिम्मेदार विभाग और अधिकारी आखिर क्यों मौन थे?

अवैध कॉलोनी का खेल — खेत बने प्लॉट, कच्ची सड़कें और करोड़ों का धंधा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार ग्राम तुईयापानी में कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉटों में काटकर कॉलोनी के रूप में विकसित किया जा रहा था। खरीदारों को लुभाने के लिए कच्ची सड़कों का निर्माण तक कर दिया गया और नक्शे व वादों के सहारे जमीनों का सौदा किया जा रहा था।
लेकिन जांच में सामने आया कि
भूमि का डायवर्जन नहीं कराया गया
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) से अनुमति नहीं ली गई
कॉलोनाइजर के रूप में कोई वैधानिक पंजीयन नहीं
इसके बावजूद प्लॉट बेचे जा रहे थे और लोगों से लाखों रुपये वसूले जा रहे थे, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
इन तीन कॉलोनाइजरों पर दर्ज हुई FIR
राजस्व निरीक्षक शिवकुमार वरकड़े की शिकायत पर थाना नैनपुर में निम्न व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया है—
नरेन्द्र जैन, पिता मुलायमचंद जैन, निवासी पिण्डरई
मुस्तफा खान, पिता अस्टू खान, निवासी नैनपुर
अकरम अंसारी, पिता मोहम्मद सफी अंसारी, निवासी नैनपुर
इनके खिलाफ मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 61-क, 61-ख एवं 61-घ (3) के तहत अपराध क्रमांक 0115/2026 दर्ज कर पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है।
बड़ा सवाल — जब प्लॉट बिक रहे थे तब प्रशासन कहाँ था?
स्थानीय लोगों का कहना है कि तुईयापानी में यह अवैध प्लॉटिंग कोई रातों-रात नहीं हुई। महीनों से खेतों में सड़कें बन रही थीं, बोर्ड लग रहे थे और प्लॉट बेचे जा रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि—
क्या राजस्व विभाग और पंचायत प्रशासन को इसकी भनक नहीं थी?
क्या समय रहते कार्रवाई होती तो भोले-भाले खरीदारों को नुकसान से बचाया जा सकता था?
आखिर किसकी शह पर चल रहा था अवैध कॉलोनियों का यह खेल?
लोगों का आरोप है कि भू-माफिया और अवैध कॉलोनाइजर आम लोगों को सस्ते प्लॉट का लालच देकर लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं, और जब विवाद सामने आता है तब प्रशासन कार्रवाई करता है।
जनता को चेतावनी — सस्ते प्लॉट के लालच में न फंसें
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी भूमि या प्लॉट को खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करें कि—
भूमि का डायवर्जन आदेश हो
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) की स्वीकृति हो
आवश्यक होने पर RERA पंजीकरण हो
अन्यथा भविष्य में कानूनी विवाद और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।