मंत्री के गृह ग्राम में रफ्तार कहर कुछ समय पहले ही खूनी खेल! 3 साल की मासूम की मौत के बाद भी नहीं जागा सिस्टम

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडलासम्पतिया उईके के गृह ग्राम टिकरवारा में बेलगाम हाईवा-ट्रैक्टर का आतंक, शिकायतों के बावजूद पंचायत, प्रशासन और विभागों की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल मंडला जिले के विकासखंड अंतर्गत ग्राम टिकरवारा, जो कि प्रदेश की पीएच मंत्री सम्पतिया उईके का गृह ग्राम है, आज गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। गांव की संकरी सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते रेत, गिट्टी और ईंट से भरे ट्रैक्टर-डंपर न सिर्फ नियमों को रौंद रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
वही सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि तेज रफ़्तार का शिकार फूलसागर के बम्होरी डंफर लापरवाही की भेंट चढ़कर एक 3 वर्षीय मासूम बालिका असमय काल के गाल में समा चुकी है। लेकिन इस हृदयविदारक घटना के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं—मानो किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ा। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों समाज सेवियों एक दो दिन चर्चा करके तरह तरह की बात की बेटी के परिजनों को सहायता दी और फिर वही हालात नजर आने लगे
बस्ती के बीच “मौत की दौड़”
गांव के बीच से गुजरने वाली सड़क पर दिन-रात भारी वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं। रेत, गिट्टी और ईंट से भरे ट्रैक्टर-डंपर तेज गति से बस्तियों के बीच से गुजरते हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा मंडरा रहा है। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रोज़ इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम नहीं।
शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों द्वारा कई बार पंचायत में शिकायतें दी गईं, यहां तक कि 26 जनवरी को लिखित आवेदन भी सौंपा गया, लेकिन आज तक न स्पीड ब्रेकर बने, न चेतावनी बोर्ड लगे और न ही भारी वाहनों पर कोई नियंत्रण किया गया।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
जिला प्रशासन आखिर क्यों मौन है?
परिवहन विभाग नियमों की धज्जियां उड़ते हुए क्यों नहीं देख रहा?
खनिज विभाग ओवरलोड और अवैध परिवहन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
ग्रामीणों में आक्रोश
वही ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उनकी मांग साफ है—
गांव की सीमा पर स्पीड ब्रेकर
गति सीमा और चेतावनी बोर्ड
भारी वाहनों के प्रवेश पर समयबद्ध रोक
वही बड़ा सवाल है कि
जब मंत्री के अपने ही गृह ग्राम में सुरक्षा के ये हाल हैं, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
आखिर कब तक टिकरवारा में “रफ्तार का कहर” यूं ही मासूम जिंदगियां निगलता रहेगा?
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