भूमाफियाओं का खुला खेल प्रशासन-कॉलोनाइजर की सांठगांठ, कृषि भूमि लूटने का तांडव
लाखों का राजस्व चोरी, नियम-कानून की धजिज्यां

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला। प्रशासन की आंखें बंद, कान बंद और मुंह बंद। नैनपुर में तोएफआईआर दर्ज हो गई, लेकिनजिले के मुख्यालय मंडला में अवैध प्लाटिंग का भयानक खेल लंबे समय से दिन-दहाड़े चलरहा है। कृषि भूमि को बिना डायवर्शन, बिना टीएनसीपी अनुमति, बिना कॉलोनाइजर लाइसेंस और बिना रेरा पंजीकरण के काटा जा रहा
है। सड़क के किनारे, बायपास
पर, बिझिंया, कटरा, पुरवा, देवदरा, बिनैका बायपास, सेमरखापा, जंतीपुर, चटुआमार, महाराजपुर, पौंडी में कच्ची कॉलोनियां फल-फूल रही हैं।प्रशासन की मिलीभगत से भूमाफिया पार्टनरशिप फर्म बनाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं,
जबकि शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। यह कोई सामान्य उल्लंघन नहीं, बल्कि खुले आम लूट है – और ऊपर से नीचे तक की सेटिंग इसे बेखौफ बना रही है!नैनपुर के पिंडरई में तहसीलदार की जांच के बाद तीन भूमाफियाओं नरेंद्र जैन, मुस्तफा खान और अकरम अंसारी के खिलाफ थाना नैनपुर में एफआईआर दर्ज हुई है। आरोप – बिना डायवर्शन, बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की मंजूरी और बिना कॉलोनाइजर पंजीकरण के कृषि भूमि पर प्लाटिंग।
वही कलेक्टर सोमेश मिश्रा और एसडीएम आशुतोष सिंह ठाकुर के निर्देश पर खसरे ब्लॉक कर क्रय-विक्रय पर तुरंत रोक लगा दी गई। आरोपियों पर मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम-1993 की धारा 61क, 61ख और 61घ(3) के तहत अपराध क्रमांक 0115/2026 दर्ज किया गया। लेकिन यही प्रशासन मंडला
मुख्यालय में क्यों चुप है?
अक्षरधाम कॉलोनी के रहवासी चीख-चीख कर कह रहे हैं – हम
ठगे गए कॉलोनाइजर ने बाउंड्री तोड़कर प्लाटिंग शुरू कर दी। कलेक्टर के साफ आदेश के बावजूद जेसीबी-डंपर दिन-रात चल रहे हैं। बच्चे सड़क पर खेल रहे हैं, दुर्घटना की आशंका हर पल मंडरा रही है। कोई कार्रवाई नहीं। इसी तरह महाराजपुर, लालीपुर, बिझिंया
पंचायत और नगर पालिका क्षेत्र में 13 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों की फाइलें कलेक्ट्रेट में धूल खा रही हैं। आठ लालीपुर में, सात महाराजपुर में। नगर पालिका से सड़क बनवा कर प्लाटिंग स्थल तक माल पहुंचाने का बंदोबस्त भी कर लिया गया है।
नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं!
मध्यप्रदेश भूमि राजस्व संहिता के अनुसार कृषि भूमि कोप्लाटिंग के लिए अनिवार्य रूप से डायवर्शन कराना पड़ता है। एक से ज्यादा प्लाट काटने पर कॉलोनाइजर एक्ट के तहत पंजीकरण, लाइसेंस, टीएनसीपीस्वीकृति, विकास शुल्क जमा करना जरूरी है। रेरा कानून के तहत हर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड होना चाहिए।
लेकिन यहां न डायवर्शन, न
लाइसेंस, न रेरा – सिर्फ सांठगांठ! शहरी विकास प्राधिकरण के नियम साफ कहते हैं दस्तावेज न होने पर रजिस्ट्री रोक दी जाए। लेकिन रजिस्ट्री हो रही है, प्लाट बिक रहे हैं, और प्रशासन मुंह फेरकर बैठा है।
वही जानकारी के अनुसार नगरीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में यह खेल चल रहा है तो शासन को लाखों का राजस्व कैसे पहुंचेगा? स्टांप ड्यूटी, नजराना, विकास शुल्क – सब की लूट हो रही है। प्लाट खरीदने वाले
आम लोग बाद में पानी, बिजली,
रजिस्ट्री, बैंक लोन में फंस रहे हैं। फिर भी एसडीएम कार्यालय से सिर्फ नोटिस निकल रहे हैं, कार्रवाई शून्य।
प्रशासन जगो, वरना जनता पूछेगी
क्या मंडला में अवैध प्लाटिंग बिना अधिकारियों की सहमति संभव है? क्या ऊपर से नीचे तक की सेटिंग चल रही है? जब नैनपुर में एक्शन हो सकता है तो मंडला मुख्यालय में क्यों नहीं? एसडीएम, नगर पालिका, तहसीलदार – सब सोए हुए हैं या फिर सांठगांठ का हिस्सा हैं? जागरूक नागरिकों का सवाल अगर सच्चाई यही है तो तुरंत जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। अन्यथा यह साबित हो जाएगा कि मंडला में भूमाफिया प्रशासन से ज्यादा ताकतवर हैं।
स्थानीय जानता का भरोसा अब जिला प्रशासन से उठाता दिलाई पढ़ रहा है और कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में नज़र आ रही है जहाँ दिखावे की कार्यवाही की जाती हा फिर उस कार्यवाही जमीदोस हों जाती हैं उसका अंजाम जानता तक नहीं पहुँच रहा है जिस कारण से स्थानीय जानता जिला प्रशासन के साथ साथ स्थानीय प्रसाशन पर अंगुलिया उठा रहें है!