तहसील मुख्यालय घुघरी में डॉक्टरों की कमी से जूझता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

आम नागरिक परेशान, स्वास्थ्य व्यवस्था ‘वेंटिलेटर’ पर

दैनिक रेवांचल टाइम्स, घुघरी (मंडला) — आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार बदहाल होती जा रही हैं। एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, नई योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
ताजा मामला तहसील मुख्यालय घुघरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही खुलकर सामने आई। जानकारी के अनुसार, सुबह 11:00 बजे तक अस्पताल में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें इलाज तो दूर, देखने वाला तक कोई नहीं था।
स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब कुछ मरीज स्वयं डॉक्टर के शासकीय आवास पर पहुंचे, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि “हम भी इंसान हैं, हमारे अपने काम होते हैं।” ऐसे में सवाल उठता है कि जब अस्पताल का निर्धारित समय तय है, तो डॉक्टरों की जिम्मेदारी आखिर कहां चली जाती है?
अस्पताल परिसर में नोटिस बोर्ड पर समय तो प्रदर्शित है, लेकिन क्या ये केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गया है? क्या ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित है?
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
रामलाल, ग्रामीण (लाटो, घुघरी)
“हम सुबह 10 बजे अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन 11 बजे तक कोई डॉक्टर नहीं आया। न किसी ने जांच की, न कोई देखने वाला था।”
श्यामले मरकाम, निवासी खम्हरिया (घुघरी)
“घुघरी अस्पताल के डॉक्टर अब किसी से बात करना तक पसंद नहीं करते। कॉल करने पर भी जवाब नहीं मिलता। ऐसा लगता है जैसे डॉक्टर ‘भगवान’ बन चुके हैं, जो 11 बजे से पहले अस्पताल आना जरूरी नहीं समझते।”
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
जब इस गंभीर मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन कॉल तक रिसीव करना उचित नहीं समझा। इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदार अधिकारी भी इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं हैं।
बड़े सवाल
क्या यही है सरकार की “हर घर स्वास्थ्य सेवा” की हकीकत? क्या ग्रामीणों को समय पर इलाज मिलना उनका अधिकार नहीं है? क्या लाखों के वेतन और सुविधाओं के बावजूद डॉक्टरों की जवाबदेही खत्म हो चुकी है?
आखिर कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?

वही घुघरी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज खुद ‘आईसीयू’ में नजर आ रहा है, जहां मरीजों से ज्यादा इलाज की जरूरत व्यवस्था को है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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