आखिर पेशा मोबिलाइजरों को सामूहिक काम बंद कर करना ही पड़ा बड़े आंदोलन का एलान
रेवांचल टाईम्स- मंडला जुलाई 2025 तक नहीं लोटेंगे प्रदेश सहित जिले भर के पेशा मोबिलाइजर काम पर,ग्राम पंचायतों के आवश्यक कार्य प्रभावित होने पर कौन होगा जिम्मेदार!
घोषणानुसार नहीं दिया जा रहा है दोगुना मानदेय और पांच महीने से बाकी है मानदेय भी
पेशा मोबिलाइजर कर्मचारी संघ को 7 जुलाई से पंद्रह दिन का सामूहिक अवकाश पर जाकर काम बंद हड़ताल शुरू कर उग्र आंदोलन का एलान करने मजबूर होना पड़ गया है। उनकी लंबित मांगें समय पर नहीं माने जाने पर जल्द ही उग्र आंदोलन पर जाने बाध्य होने की भी बात कही जा रही है।
संघ के नारायणगंज ब्लाक शाखा अध्यक्ष मदन सिंह वरकड़े और सचिव देव सिंह मसराम से समुदाय वार्ता टीम सह पालक महासंघ इकाई मण्डला की बातचीत से प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार 7 जुलाई 2025 को जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के हाथों सूचना पत्र सौपा गया है। जिसमें बताया गया है, प्रदेश संगठन के आवाहन पर नारायणगंज ब्लाक के सभी पेशा मोबिलाइजर 7 जुलाई से 21 जुलाई तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।माजरा यह है,कि मानदेय चार हजार से आठ हजार बढ़ाकर देने वाली घोषणा को तत्काल लागू कराने तथा पांच महीने से लंबित मानदेय का भुगतान तत्काल कराने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 24 जून 2025 को ध्यानाकर्षण ज्ञापन सौंपा गया था। जिसमें तीन दिन के भीतर मांगें पूरी कर दी जाने, अन्यथा एक सप्ताह बाद उग्र आन्दोलन के लिए बाध्य हो जाने का भी उल्लेख था। चूंकि 24 जून से अब तक पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी मांगों की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पिछले पांच महीने से मानदेय भुगतान नहीं होने के कारण पेशा मोबिलाइजरों के परिवार दाने-दाने के लाले पड़ गए हैं। इनका कहना है,कि हम सारा समय ग्राम पंचायत में रहकर सौंपे गए सारे काम करते हैं। अलग से कोई काम करने का समय बिल्कुल भी नहीं मिल पाता है। जिससे आमदनी का एक मात्र जरिया पेशा मोबिलाइजर काम ही होता है। जिससे मिलने वाले अत्यंत कम मानदेय से परिवार के भरण-पोषण की बात करना तो बेमानी होगी , फिलहाल उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए स्कूलों में दर्ज कराना,उनकी पुस्तक, कापियां,बस्ता,ड्रेस आदि पर भी खर्च करने का प्रबंध कहीं से भी नहीं हो पा रहा है।अब तो भरी बारिश में भी उनको किसी से कर्ज उधार नहीं मिल पाता है,जिससे कि उनके परिवारों के भरण-पोषण में मदद मिल सके। ऐसी अंधकारमय परिस्थिति में जिले सहित प्रदेश भर के भूखे-प्यासे पेट शोषित हजारों पेशा मोबिलाइजर सरकार की नीतियों से आक्रोशित हो चुके हैं। ऐसे आक्रोशित और शोषित लोगों ने उग्र आंदोलन के इस प्रथम चरण में कम से कम पंद्रह दिवस सामूहिक काम बंद करके विरोध प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन का ध्यानाकर्षण चाहा है। बावजूद इसके भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आने पर राजधानी में प्रदेश भर के पेशा मोबिलाइजर एकजुट होकर सरकार की नीतियों के विरोध में मोर्चा खोलने मजबूर होंगे।जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
निश्चित ही विषय विचारणीय है,कि कम से कम बारहवीं कक्षा पास पेशा मोबिलाइजर गरीब और मध्यम वर्गीय ग्रामीण परिवारों से आते हैं। इनमें से अधिकतर लोग परिवार के मुखिया और स्कूल जाने वाले बच्चों के पालक भी होते हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण,दवा इलाज सहित बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्चा उठाने ये लोग इस काम के अलावा और कोई काम करके आमदनी नहीं ले पाते हैं।इनको मानदेय में हर माह दिये जाने वाले बहुत ही कम चार हजार भी पांच महीने से भुगतान नहीं किया जा सका है, यह सरकार के लिए विचारणीय है। ये परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की किताब,कापी, ड्रेस,बस्ता आदि खरीद नहीं पा रहे हैं, जिससे इनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती जा रही है। जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। इस कमरतोड़ मंहगाई के दौर में इतनी छोटी सी राशि किसी भी परिवार को पालने के लिए कुछ भी मायने नहीं रखती है। आखिर की गई घोषणा के अनुसार महीने का आठ हजार भी कोई खास नहीं है,फिर भी यह बढ़ी हुई राशी के साथ शेष मानदेय का भुगतान जल्द किया जाना चाहिए। हमने इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री जी के ईमेल पते पर आग्रह युक्त पत्राचार कर जल्द ही निराकरण करने का विनम्र आग्रह किया है
पी.डी.खैरवार
पालक महासंघ(म.प्र.) जिला इकाई मण्डला।