डिण्डोरी में मस्जिद के सामने खुलेआम बिक रही अवैध शराब: पुलिस संरक्षण में गन्नू का धंधा फूला-फला, शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं
रेवाँचल टाईम्स- डिण्डोरी, आदिवासी बाहुल्य जिले की कहानी भी अजब ग़ज़ब है इन जिलों में एक कहावत सही शाबित हो रही है की जिसकी लाठी उसकी भैस आज उसी तर्ज़ में जिला का संचालन हो रहा है जहाँ जैसे ही नगर निरीक्षक बदले गए वैसे ही बंद जगहों में अपराध और अबेध कारोबारियों के हौसले बुलंद हो गए नर्मदा तटो जो शराब बंद थी वह अब जगह जगह खुलेआम बिक रही है और इसकी जानकारी सबको है पर कार्यवाही करेगा कौन क्योकि सबको शराब ठेकेदार हप्ता महीना दे रहा है इस कारण से मंदिर हो या फिर मस्जिद सब के किनारे शराब बिक रही है!
वही सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक ओर प्रदेश सरकार शराबबंदी की नीति को लागू करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर डिण्डोरी जिले में इन दावों की सरेआम धज्जियाँ उड़ रही हैं। जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित एक मस्जिद के ठीक सामने वर्षों से अवैध शराब बिक रही है …. और पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। स्थानीय लोगों की मानें तो यह गोरखधंधा पुलिस की खुली शह में चल रहा है।
‘गन्नू’ की दुकान, पुलिस की परछाईं
इस अवैध शराब कारोबार का संचालन गणेश उर्फ गन्नू नामक व्यक्ति वर्षों से कर रहा है। क्षेत्रवासियों के अनुसार, गन्नू का धंधा जितना पुराना है, उतनी ही पुरानी उसकी पुलिस से सेटिंग भी है। हर महीने बकायदा ‘हफ्ता’ पहुंचाया जाता है …. जिसकी वजह से शिकायतों को या तो रद्दी टोकरी में डाल दिया जाता है या फिर शिकायतकर्ता को ही डराया-धमकाया जाता है।
मस्जिद के सामने अपवित्रता, पुलिस बनी रह गई पत्थर
यह कोई साधारण स्थान नहीं है। यह एक मस्जिद का प्रवेश द्वार है …. जहाँ हर दिन सैकड़ों लोग इबादत के लिए आते हैं। शराब के नशे में धुत लोग वहीं खड़े होकर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, बोतलें फोड़ते हैं, और कभी-कभी नमाज़ियों को परेशान तक करते हैं। मस्जिद कमेटी ने थाना, एसडीओपी, कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक को कई बार शिकायत भेजी है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
नए थाना प्रभारी के आने से बिगड़े हालात
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पहले गन्नू छुप-छुपाकर शराब बेचता था। लेकिन नए थाना प्रभारी के आते ही मानो उसे सरकारी गारंटी मिल गई हो। अब वह सरेआम स्टूल लगाकर, बोतलें सजा कर, पूरी बेशर्मी के साथ शराब बेचता है। दिन हो या रात, पुलिस की गाड़ी मोहल्ले में घूमती तो है, पर कार्रवाई नहीं करती …. बल्कि मुस्कराकर आगे निकल जाती है।
“पुलिस नहीं, शराब माफिया की दलाल बन चुकी है” …. स्थानीय नागरिकों का गुस्सा
कुछ बुजुर्गों और युवाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि थाना प्रभारी तक ‘हफ्ता’ पहुंचाने का काम एक स्थानीय दलाल के ज़रिए होता है। पुलिस अब अपराध रोकने वाली संस्था नहीं रही, बल्कि वह अब अपराधियों की सुरक्षा एजेंसी बन चुकी है। यही कारण है कि शिकायत करने वाला आम आदमी खुद को असहाय महसूस करता है।
कानून का शासन या शराब माफिया का राज?
सबसे अहम सवाल यही है …. जब धार्मिक स्थलों के सामने अवैध शराब बिक सकती है और पुलिस जानबूझकर कुछ नहीं करती, तो फिर इस राज्य में असली सत्ता किसके हाथ में है? पुलिस के या माफिया के?
मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक को जगाने का समय अब आ गया है। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब नर्मदा किनारे बसे इस शांत जिले को ‘माफियाओं की पनाहगाह’ कहे जाने लगेगा।