पडरिया ग्राम पंचायत ने आवारा गौवंशों को भेजा गौशाला, गौवंश मालिकों पर लगाया जुर्माना

रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले के विकास खंड नारायणगंज पडरिया ग्राम पंचायत द्वारा आवारा गौवंश की समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रभावशाली कार्रवाई की गई। विगत कुछ समय से ग्राम क्षेत्र में सड़कों पर खुलेआम घूम रहे गौवंश से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों की सुरक्षा, फसलों की रक्षा तथा सड़क हादसों को रोकने की दृष्टि से पंचायत ने 9 जुलाई 2025 को एक सार्वजनिक सूचना जारी की थी। इसमें सभी गौपालकों को सचेत किया गया था कि यदि उनके गौवंश सड़कों पर आवारा घूमते पाए गए, तो उन्हें समीप की गौशाला में भेज दिया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
इसी क्रम में 26 जुलाई 2025 को पंचायत द्वारा कार्रवाई करते हुए कुल 12 आवारा गौवंशों को पकड़ा गया और उन्हें सिवनीमाल स्थित मुख्यमंत्री गौशाला में सुरक्षित रूप से पहुंचाया गया। इसके अलावा कुछ गौवंश मालिकों को अपने मवेशियों को सड़कों पर छोड़ने के कारण ₹4500 का जुर्माना लगाया गया। साथ ही उनसे एक शपथ पत्र भी भरवाया गया, जिसमें उन्होंने यह स्वीकार किया कि भविष्य में यदि उनके गौवंश फिर से आवारा घूमते पाए जाते हैं, तो पंचायत उन्हें पुनः गौशाला में भेजने के लिए स्वतंत्र होगी और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
इस अभियान में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुप्ता की टीम, थाना टिकरिया के प्रभारी गोपाल घासले, ग्राम पंचायत सचिव अभिषेक शर्मा, ग्राम प्रधान राजकुमार तेकाम तथा पंचायत के अन्य कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। यह संयुक्त प्रयास प्रशासन, पंचायत और पशु विभाग के तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा, जिसकी स्थानीय लोगों ने सराहना की।
वही ग्रामवासियों का कहना है कि यह पहल समय की आवश्यकता थी। खुलेआम घूमते मवेशी न केवल सड़कों पर खतरा पैदा कर रहे थे, और सड़कों चौराहों में बैठे आवारा जानवरों के कारण सड़कों में आवागमन करने वाले यात्री की इन जानवरों के कारण घटना दुर्घटना हो रही हैं और बडे वाहनों की टक्कर से पशु भी चोटिल के साथ उनकी मौत हो रही हैं साथ आवारा पशु खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान भी पहुँचा रहे थे। कई बार ग्रामीणों ने इस विषय में शिकायत की थी, लेकिन अब पंचायत द्वारा की गई ठोस कार्रवाई से एक सकारात्मक संदेश गया है।
थाना प्रभारी गोपाल घासले ने बताया कि यदि भविष्य में भी कोई गौवंश आवारा हालत में पाया जाता है, तो संबंधित पशुपालकों पर जुर्माना एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पशु चिकित्सा अधिकारी ने गौशाला में पहुंचाए गए पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण एवं देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित की।
वही पडरिया ग्राम पंचायत की इस सक्रिय कार्यवाही ने अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। यदि इसी प्रकार पंचायतें जनसहयोग एवं प्रशासन के साथ मिलकर कदम उठाएं, तो आवारा पशुओं की समस्या से काफी हद तक निजात पाई जा सकती है।